-छह माह पहले 5 युवा कारोबारियों ने रखी थी नींव, जो अब 70 लोग जुड़ गए
रायपुर। राजधानी के देवेंद्र नगर में एक अनोखी पहल इन दिनों लोगों को अपनी ओर खींच रही है। एक साधारण-सा दफ्तर, शाम का समय, न कोई डीजे, न माइक और न ही कोई वाद्ययंत्र। केवल ताली की ताल और श्याम बाबा जी के भजन की मधुर धुन—और उसी में सुकून खोजते युवा। Clapping and chanting provided a break from weekend parties, as Devendra Nagar’s youth embarked on a new journey of peace.
यह है ‘ताली-कीर्तन—एक ऐसी वीकेंड एक्टिविटी जिसने शहर के युवाओं की दिनचर्या बदल दी है। अब न कोई वीकेंड पार्टी, न कही सैर-सपाटा। फिर चलिए व्यवसाय खबर डॉट कामvyavasaykhabar.com के साथ जानते है आखिर कैसे इसकी हुई शुरुआत।

28 जून को शुरू हुई पांच दोस्तों की पहल
शुरुआत पांच युवा व्यवसायियों—नितिन अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, उदित अग्रवाल, रजत अग्रवाल और सौरभ अग्रवाल—ने 28 जून को की थी। हफ्तेभर की टेंशन, बिज़नेस का दवाब और बिगड़ती दिनचर्या… इन सबके बीच सुकून ढूंढने का रास्ता उन्हें ताली-कीर्तन में मिला। अब पांच महीनों बाद यह छोटा-सा ग्रुप बढ़कर 50-70 सदस्यों का परिवार बन गया है। खास बात यह है कि अब इसमें सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि वरिष्ठजन भी बढ़-चढ़कर शामिल हो रहे हैं।

‘लोग होटल-बार में बैठे देखे, उसी से सीख ली ‘—अनिल अग्रवाल

अनिल अग्रवाल कहते हैं—
‘वीकेंड पार्टी आज लोगों की मजबूरी जैसी बन गई है। हर शनिवार होटल-बार में देर रात तक बैठना, शोर में खो जाना और अगले दिन अपराधबोध के साथ उठना… इस लाइफस्टाइल हमें थका रहा था। इससे बचने के लिए हमने ताली-कीर्तन को चुना। यहां कोई प्रवचन नहीं, न दिखावा—बस साथ बैठकर डेढ़-दो घंटे मन को शांत करते हैं। ‘नितिन और अनिल अग्रवाल के दफ्तर के हॉल में हर शनिवार श्याम बाबा का दरबार सजा होता है। वहीं ताली-कीर्तन की धुनें पूरे माहौल को सकारात्मकता से भर देती हैं।


ताली और सामूहिक भजन का विज्ञान भी है दिलचस्प

उदित अग्रवाल बताते हैं—
‘ताली बजाने से हाथों के प्रेशर पॉइंट एक्टिव होते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा बढ़ती है। साथ गाने से तनाव हार्मोन घटते हैं और सकारात्मक हार्मोन बढ़ते हैं। यह सिर्फ भजन नहीं, बल्कि मन और शरीर को संतुलित करने वाली गतिविधि है। ‘यही वजह है कि जो लोग एक बार शामिल होते हैं, अक्सर अगली बार किसी नए दोस्त या परिवारजन को साथ लेकर आते हैं।
समाज के लिए मिसाल बनता जा रहा यह ग्रुप ताली-कीर्तन से न केवल व्यक्तिगत सुकून बढ़ा है, बल्कि यह समूह एक नई सामाजिक ऊर्जा भी बना रहा है—जहां लोग एक-दूसरे का साथ पाते हैं, सकारात्मकता साझा करते हैं और शनिवार रात को मस्ती नहीं, बल्कि शांति के साथ बिताते हैं।
इस पहल में मुख्य रूप से साथ देने वालों में—सुधीर मग्गू, नारायण मूलचंदानी, मनीष मोटवानी, नैना अग्रवाल, सत्येन्द्र बीसेन, दिव्यांश मोदी, अमन अग्रवाल, राकेश दुबे, नीरज बिर्मीवाल आदि नियमित रूप से अपने योगदान दे रहे हैं।







