सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की एंट्री रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है
रायपुर।आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और हमलों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सभी विभागों को अलर्ट कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद प्रदेश में स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सोसाइटी खेल मैदान और सभी भीड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की एंट्री रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है।
एक हफ्ते में होगी पहचान सरकारी अमले को 7 दिनों के भीतर ऐसे सभी सार्वजनिक स्थानों की पहचान करनी होगी, जहा आवारा कुत्ते बेरोकटोक प्रवेश करते हैं। इसके बाद वहा गेट, फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। हर जगह एक नोडल अफसर नियुक्त होगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि कुत्तों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहे।

कौन क्या करेगा?—विभागों की जिम्मेदारिया
1. पशुधन विकास विभाग
- आवारा कुत्तों की नसबंदी
- कुत्तों के आश्रय स्थल पर पशु चिकित्सक की नियुक्ति
2. स्वास्थ्य विभाग
- सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन
- इम्यूनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराना
3. लोक निर्माण विभाग (PWD)
- कुत्तों के प्रवेश वाले स्थानों की पहचान में मदद
- फेंसिंग, गेट, बाउंड्रीवॉल निर्माण की जिम्मेदारी
4. शिक्षा विभाग
- स्कूलों/संस्थानों में छात्रों व कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था
- काटने पर तुरंत उपचार की तैयारी


कुत्तों की एंट्री हमेशा बंद रहे, इसके लिए निर्देश
- नगर पालिका और पंचायतें हर तीन महीने में निरीक्षण करेंगी
- कुत्तों को हटाना और नसबंदी की नियमित व्यवस्था
- अस्पतालों में ARV और इम्यूनोग्लोबुलिन का अनिवार्य स्टॉक
- स्कूलों में किसी घटना पर तुरंत मेडिकल सुविधा
- खेल मैदानों में सुरक्षा/ग्राउंड स्टाफ की तैनाती
नगरीय प्रशासन विभाग की भूमिका
- कुत्तों के लिए बाड़ा और आश्रय स्थल, पशु चिकित्सक व देखभाल कर्मचारी
- हर वार्ड में भोजन व्यवस्था, ताकि कुत्ते भटकें नहीं
- भीड़ वाले स्थानों में एंट्री रोकने की व्यवस्थाएँ
- स्ट्रीट डॉग्स को लोग गोद लें, इसके लिए प्रेरित करना






