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मोतियाबिंद ऑपरेशन में लूट: 750 रुपए के लेंस के लिए वसूले जा रहे 15 हजार, प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत

-इंजीनियरिंग पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन ने लगाया आरोप

.. कैशलेस स्वास्थ्य योजना में अस्पताल कर रहे मनमानी, इंट्राऑक्युलर घटिया लेंस लगाया जा रहा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पॉवर कंपनियों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए लागू कैशलेस स्वास्थ्य योजना में गड़बड़ियों की परतें अब खुलने लगी हैं।

मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान उपयोग में आने वाले इंट्राऑक्युलर लेंस की गुणवत्ता और कीमत को लेकर अस्पतालों पर गंभीर आरोप लगे हैं। वहीं इंजीनियरिंग पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन ने अब इस मामले को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की है।

750 रुपये का लेंस, मरीज से वसूले 15,000
शिकायत में बताया गया है कि 750 रुपये में खरीदे गए हाईड्रोफोबिक फोल्डेबल लेंस की एमआरपी 15,000 रुपए तक बताई जा रही है। इतना ही नहीं, वही पूरी रकम मरीजों से वसूली भी जा रही है, जबकि नियम के अनुसार केवल 16 प्रतिशत लाभ के साथ कीमत तय की जानी चाहिए।

सीलिंग प्राइस निर्धारित करने की मांग
एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके खरे का आरोप है कि लेंस निर्माता कंपनियां और अस्पताल मिलकर मरीजों को संगठित तरीके से लूट रहे हैं। इस लूट को रोकने के लिए उन्होंने इंट्राऑक्युलर लेंस को डीपीसी शेड्यूल में शामिल करने और इसकी सीलिंग प्राइस निर्धारित करने की मांग की है।

नियमों का हो रहा है खुलेआम उल्लंघन
शिकायत में कहा गया है कि आंखों के अस्पताल मरीजों से लेंस की गुणवत्ता के नाम पर जबरन अतिरिक्त रकम वसूल रहे हैं। पैसे नहीं देने पर उन्हें घटिया क्वालिटी के लेंस लगाए जा रहे हैं। एसोसिएशन ने बताया कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, हर लेंस की अधिकतम कीमत और उस पर मुनाफा तय है, लेकिन अस्पताल इस नियम का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।

1 अप्रैल से अब तक 150 ऑपरेशन, लूट जारी
राज्यभर में 1 अप्रैल से 30 अगस्त तक करीब 150 मोतियाबिंद ऑपरेशन इस योजना के तहत किए जा चुके हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके खरे ने बताया कि यह योजना डॉक्टरों के बीच बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि बिल जमा करने के 10 दिन के भीतर भुगतान मिल जाता है। लेकिन अस्पताल इस योजना का दुरुपयोग करते हुए लेंस की कीमत के नाम पर मरीजों से जबरन वसूली कर रहे हैं।


इंट्राऑक्युलर लेंस की कीमत भी तय हो
उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि जैसे स्टेंट की कीमतों पर नियंत्रण लगाया गया, उसी तरह इंट्राऑक्युलर लेंस की अधिकतम कीमत भी तय की जाए। इससे आम बुजुर्गों, कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधी राहत मिलेगी और कैशलेस योजना की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।

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