–संघर्षों के निर्णयों में भी उन्होंने संयम और संतुलन बनाए रखा
रायपुर। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो समय से पहले चले जाते हैं, लेकिन अपनी कर्मठता, सरलता और मानवीय मूल्यों के कारण स्मृतियों में सदा जीवित रहते हैं। स्वर्गीय राजेश जैन ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिनका जीवन सादगी, संस्कार और सामाजिक सरोकारों का प्रतीक रहा।
समाज को अपूरणीय क्षति हुई28 अक्टूबर 1961 को जन्मे स्व. राजेश जैन का 12 जनवरी 2009 को आकस्मिक निधन हो गया। उनके जाने से न केवल परिवार, बल्कि मित्रों, सहयोगियों और समाज को अपूरणीय क्षति हुई। वे भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनकी स्मृतियां, उनके विचार और उनके द्वारा छोड़े गए संस्कार आज भी हर धड़कन में महसूस किए जाते है।

कर्तव्यनिष्ठा उनके जीवन के मूल स्तंभ रहेस्व. राजेश जैन संस्कार और सच्चाई की पहचान थे। धर्मपरायणता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा उनके जीवन के मूल स्तंभ रहे। संघर्षों के निर्णयों में भी उन्होंने संयम और संतुलन बनाए रखा और अपने आचरण से यह सिखाया कि सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मूल्यों से मापी जाती है।
दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देंउन्होंने मानवीय मूल्यों के साथ हर रिश्ते को संजोकर रखा। पिता, भाई, मित्र और मार्गदर्शक के रूप में उनकी भूमिका सदैव प्रेरणास्रोत रही। व्यवसाय खबर डॉट कॉम की पूरी टीम स्व. राजेश जैन को शत-शत् नमन करती है और ईश्वर से प्रार्थना करती है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। शोकाकुल परिवार को यह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
विनम्र श्रद्धांजलि







