5 महीने से फरार हिस्ट्रीशीटर को ग्वालियर से पकड़ा गया, पुरानी बस्ती से मठपारा तक पुलिस का सख्त ऐक्शन
रायपुर। सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग और धमकी के मामलों में फरार चल रहे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी तोमर को रायपुर पुलिस ने ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस उसे राजधानी लाई, तो शहर के कई इलाकों में पुलिस की सख्त कार्रवाई देखने को मिली। पुरानी बस्ती से लेकर भाठागांव और मठपारा तक पुलिस काफिला निकला, जिसमें भारी सुरक्षा बल मौजूद था।
पुलिस कार्रवाई के दौरान इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। कई लोगों ने नारे लगाए — “तोमर गिरफ्तार हुआ!” वहीं, आरोपी की पत्नी पुलिस से भावनात्मक अपील करती दिखी — “मार डालो, लेकिन परेशान मत करो।”
इलाके में सनसनी, लोगों ने लगाए आरोप
जब पुलिस टीम आरोपी को लेकर भाठागांव और मठपारा पहुंची, तो लोगों में खासा उत्साह और आक्रोश दिखा। कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्होंने तोमर को कई बार लोगों से ब्याज वसूलते और धमकाते देखा था।
एक महिला ने बताया — “उसने हमसे सोने का जेवर गिरवी रखवाया और बाद में अपने नाम कर लिया।”
मठपारा इलाके में भीड़ के बीच आरोपी कई बार बेहोश होता दिखा, जिसे पुलिस ने संभाला और बाद में गाड़ी में बैठाकर थाने ले जाया गया।
30 दिन में 7 एफआईआर, फिर फरारी
पिछले साल जून माह में केवल 30 दिनों के भीतर वीरेंद्र और उसके भाई रोहित तोमर के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज हुईं — जिनमें मारपीट, धमकी, ब्लैकमेलिंग और सूदखोरी के आरोप शामिल थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों दिल्ली, राजस्थान और मध्यप्रदेश में ठिकाने बदलते रहे।
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद दोनों की मुश्किलें बढ़ीं। अंततः पुलिस ने ग्वालियर में वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उसका भाई अब भी फरार है।
16 से ज्यादा केस और करोड़ों की संपत्ति
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वीरेंद्र के खिलाफ 16 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं —
- 2006: चाकूबाजी (आजाद चौक थाना)
- 2010: व्यापारी से मारपीट (गुढ़ियारी)
- 2013: हत्या का मामला
- 2019: धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग
- 2024: आर्म्स एक्ट और सूदखोरी
छापेमारी में पुलिस को करीब 40 करोड़ से अधिक की संपत्ति, साढ़े तीन करोड़ रुपए का सोना, 10 लाख की चांदी, ब्लैंक चेक और कई बैंक दस्तावेज मिले थे।







