पार्क एवेन्यू जैसे ब्रांड लॉन्च किए और रेमंड को ‘The Complete Man’ की मजबूत छवि दी
डेस्क, नई दिल्ली। रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन और प्रसिद्ध उद्योगपति विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में 28 मार्च 2026 को निधन हो गया था। उन्होंने न सिर्फ एक छोटी टेक्सटाइल मिल को देश की प्रमुख कंपनी में तब्दील किया, बल्कि भारतीय पुरुषों के फैशन को नई पहचान दी। उनकी दूरदर्शिता और साहसिक स्वभाव ने उन्हें व्यापार और साहस दोनों क्षेत्रों में यादगार बना दिया। भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति और Raymond Group को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले विजयपत सिंघानिया का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। एक समय देश के सबसे सफल बिजनेस लीडर्स में गिने जाने वाले सिंघानिया का सफर आज संघर्ष और सीख की मिसाल बन चुका है।
छोटी मिल से 12,000 करोड़ का साम्राज्य

1980 में विजयपत सिंघानिया ने रेमंड ग्रुप की कमान संभाली। उस समय कंपनी सिर्फ ऊनी कपड़ों की एक मिल थी। उनके नेतृत्व में रेमंड ने स्टील, डेनिम और सूटिंग-शर्टिंग के बाजार में क्रांति ला दी।
उन्होंने पार्क एवेन्यू जैसे ब्रांड लॉन्च किए और रेमंड को ‘The Complete Man’ की मजबूत छवि दी, जो आज भी भारतीय पुरुषों के स्टाइल का पर्याय बनी हुई है। उनकी मेहनत से कंपनी का कारोबार बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह सफर उनकी व्यावसायिक दूरदृष्टि और नवाचार की मिसाल था।
आसमान छूने वाले पायलट
विजयपत सिंघानिया सिर्फ उद्योगपति नहीं, बल्कि पायलट भी थे। 1988 में उन्होंने माइक्रोलाइट विमान से लंदन से दिल्ली तक 9,655 किलोमीटर की दूरी 23 दिनों में तय कर एंड्योरेंस रिकॉर्ड बनाया।
67 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई से हॉट एयर बैलून उड़ाकर 69,000 फीट की ऊंचाई हासिल की, जो उस समय विश्व रिकॉर्ड था। विमानन क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

परिवारिक विवाद और कड़वे अनुभव
विजयपत सिंघानिया का बचपन आसान नहीं था। मां की कमी और सौतेली मां की कठोरता ने उनके स्वभाव को सख्त बना दिया। 12 साल की उम्र में उनका विवाह 9 साल की आशा सिंघानिया से तय हो गया था। 2015 में उन्होंने बेटे गौतम सिंघानिया को कंपनी और 37 प्रतिशत हिस्सेदारी सौंप दी।
लेकिन बाद में परिवारिक संबंध बिगड़ गए। उन्हें जेके हाउस में रहने का वादा किया गया था, लेकिन बेटे ने देने से इनकार कर दिया।2017 में वे किराए के मकान में रहने को मजबूर हो गए। इस घटना के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सलाह दी थी कि मरने से पहले अपनी संपत्ति बच्चों को न सौंपें।

शाही जीवनशैली
पहले के वर्षों में उनकी जीवनशैली बेहद शानदार थी। वे मुंबई के मालाबार हिल पर स्थित 37 मंजिला जेके हाउस में रहते थे, जिसकी कीमत उस समय 6,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लग्जरी कारों के शौकीन विजयपत के पास कई महंगी गाड़ियां थीं। विजयपत सिंघानिया की विरासत रेमंड ब्रांड, पार्क एवेन्यू और भारतीय पुरुष फैशन की नई छवि के रूप में बची रहेगी। उनका निधन भारतीय उद्योग जगत के लिए एक युग का अंत है।
जारी रहा विवाद
मार्च 2024 में साथ में खींची गई एक तस्वीर से अटकलें लगीं कि गौतम और उनके पिता विजयपत सिंघानिया के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद सुलझ गया है। मगर विजयपत ने कहा कि यह मुलाकात सुलह के लिए नहीं थी। उन्होंने कहा था कि संपत्ति और शेयरों को लेकर विवाद अभी भी जारी है।
कानपुर में हुआ था जन्म

विजयपत सिंघानिया का जन्म 4 अक्टूबर, 1938 को कानपुर में हुआ था। वे JK Group परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो भारतीय व्यापार जगत में पहले से ही एक जाना-माना नाम है। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने करियर की शुरुआत कर दी थी, क्योंकि उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें बिजनेस वर्क्स तक सीधी पहुँच रही।
उनके कारोबारी ज्ञान का डेवलपमेंट मुंबई के सिडेनहम कॉलेज में उनकी पढ़ाई के दौरान हुआ, जहाँ उन्होंने कॉमर्स की शिक्षा प्राप्त की। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने अपने पारिवारिक बिजनेस में काम किया, जहाँ वे धीरे-धीरे कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते रहे।
सीख: सफलता से ज्यादा जरूरी संतुलन

विजयपत सिंघानिया की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि जीवन के उतार-चढ़ाव की भी कहानी है। यह हमें सिखाती है कि:
- संपत्ति से ज्यादा रिश्तों की अहमियत होती है
- फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए
- सफलता के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है







