लीकेज और दूषित पानी की शिकायतें मिल रही थीं
रायपुर। शहरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर निगम ने बड़ा और दूरगामी निर्णय लिया है। मेयर इन काउंसिल की बैठक में जल बोर्ड के गठन को मंजूरी दी गई है। यह बोर्ड शहर की पूरी जल व्यवस्था—पेयजल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन, पाइपलाइन रखरखाव और जल संसाधनों की निगरानी—की जिम्मेदारी संभालेगा। निगम अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग जोनों और वार्डों में लंबे समय से जल वितरण, लीकेज और दूषित पानी की शिकायतें मिल रही थीं, जिन्हें देखते हुए यह निर्णय लिया गया।

बैठक में दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। निगम आयुक्त विश्वदीप ने जलकार्य विभाग को निर्देश दिए कि अब क्लोरीन डोजिंग और बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट रिपोर्ट नियमित रूप से निगम मुख्यालय में सार्वजनिक की जाएंगी। पहले यह रिपोर्ट केवल फिल्टर प्लांट और विभागीय फाइलों तक सीमित रहती थीं।
पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी जोनों से प्रतिदिन पानी के सैंपल लेकर जांच के निर्देश दिए गए हैं। फिल्टर प्लांट में प्रारंभिक जांच के बाद यदि किसी प्रकार की शंका पाई जाती है, तो सैंपल एनआईटी रायपुर की एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में भेजे जाएंगे, जहां फिजिकल, केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण के बाद लगभग 72 घंटे में रिपोर्ट प्राप्त होगी। यह प्रक्रिया हर दसवें दिन अनिवार्य रूप से की जाएगी।
इसके साथ ही शहर की सभी पानी की टंकियों और सम्पवेल की सिल्ट सफाई और डिसइंफेक्शन के आदेश दिए गए हैं। सफाई के बाद टंकियों पर तिथि अंकित करना अनिवार्य होगा। सेल्स टैक्स कॉलोनी, जगन्नाथनगर और पिंक सिटी जैसे क्षेत्रों में दूषित पानी की शिकायतों को देखते हुए एक माह तक विशेष सिस्टम सुधार अभियान चलाया जाएगा। रोजाना लीकेज और खराब पाइपलाइन की जांच कर तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं।
नालियों से गुजरने वाली मेन राइजिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइनों की रिपोर्ट तलब कर उनके शिफ्टिंग प्रस्ताव मांगे गए हैं। क्लोरीन डोजिंग में भी सख्ती बरती जाएगी। जिन टंकियों में रेसीड्यूल क्लोरीन मानक से कम मिलेगी, वहां दोबारा क्लोरीनेशन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सोडियम हाइपोक्लोराइड और ब्लीचिंग पावडर का उपयोग होगा।

नगर निगम हर साल पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए लगभग 80 लाख रुपए क्लोरीन पर खर्च करता है। जल बोर्ड के गठन और सख्त निगरानी व्यवस्था के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि रायपुर शहर को भविष्य में स्वच्छ, सुरक्षित और निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।







