समय के साथ बजट प्रस्तुति की तारीख में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया
नई दिल्ली | vyavasaykhabar.com देश का आम बजट हर वर्ष 1 फरवरी को ही क्यों पेश किया जाता है, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। पहले यह परंपरा अलग थी, लेकिन समय के साथ बजट प्रस्तुति की तारीख में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया।
पहले कब पेश होता था बजट
स्वतंत्रता के बाद कई वर्षों तक भारत का आम बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस को शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह परंपरा ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही थी, ताकि भारत और ब्रिटेन के समय में सामंजस्य बना रहे।
1 फरवरी की परंपरा कब शुरू हुई
वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने बजट पेश करने की तारीख में बड़ा बदलाव किया। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट को फरवरी के अंतिम दिन की बजाय 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा शुरू की।
तारीख बदलने के पीछे कारण
सरकार का मानना था कि बजट यदि 1 फरवरी को पेश किया जाए तो नई योजनाओं, नीतियों और परियोजनाओं को अतिरिक्त समय मिल सके। इससे
- मंत्रालयों को योजनाओं को लागू करने का पर्याप्त समय मिलता है
- वित्तीय वर्ष की शुरुआत (1 अप्रैल) से पहले काम शुरू हो पाता है
- विकास योजनाओं में देरी कम होती है
बजट से जुड़ी गोपनीय परंपरा
बजट से पहले की सबसे अहम और गोपनीय प्रक्रिया होती है ‘हलवा सेरेमनी’। इसके बाद बजट दस्तावेजों की छपाई शुरू होती है और बजट पेश होने तक इससे जुड़े अधिकारी बाहरी संपर्क से दूर रहते हैं, ताकि जानकारी लीक न हो।
शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे तक का सफर
पहले बजट शाम 5 बजे पेश होता था, लेकिन वर्ष 1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे सुबह 11 बजे पेश करने की परंपरा शुरू की, जिससे यह आम लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक हो सके।

आगामी बजट पर सभी की नजर
अब देश की निगाहें आगामी आम बजट पर टिकी हैं। खासतौर पर मध्यम वर्ग, किसान, व्यापारी और उद्योग जगत को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं कि सरकार आर्थिक विकास को और गति देने वाले फैसले लेगी।







