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एम्स में स्किन रोगों की सटीक पहचान, डर्मोस्कोपी की नई तकनीक बनेगी मददगार

-तिल, मस्से, सोरायसिस, स्कैबीज, स्कैल्प और बालों से जुड़ी बीमारियों में होगा कारकर

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..कई केस में अब बायोप्सी करने की नहीं होगी जरूरत
..लाइव डेमो से डॉक्टरों को सिखाई आधुनिक स्किन डायग्नोसिस तकनीक
..देशभर के त्वचा विशेषज्ञ रायपुर में जुटे, डर्मोस्कोपी पर साझा किए अनुभव

रायपुर। एम्स में त्वचा रोगों की आधुनिक जांच तकनीक डर्मोस्कोपी पर राष्ट्रीय स्तर की हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई। डर्मोस्कोपी सोसायटी ऑफ इंडिया और आईएडीवीएल छत्तीसगढ़ शाखा के सहयोग से आयोजित इस वर्कशॉप का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. अशोक जिंदल ने किया।
देशभर से 70 से अधिक त्वचा रोग विशेषज्ञ शामिल हुए
रोग विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित देशभर से 70 से अधिक त्वचा रोग विशेषज्ञ, संकाय सदस्य और पीजी स्टूडेंट्स शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों को डर्मोस्कोपी तकनीक की सटीकता, उपयोगिता और आधुनिक उपचार पद्धतियों से परिचित कराना था। इस दौरान एम्स रायपुर में उपचाररत करीब 22 मरीजों की डर्मोस्कोपी जांच का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।


आधुनिक जांच उपकरण यंत्र
विशेषज्ञों ने बताया कि यह तकनीक त्वचा की गहरी परतों तक पहुंचकर उन सूक्ष्म बदलावों की पहचान करने में सक्षम है, जिन्हें सामान्य आंखों से देख पाना मुश्किल होता है। डर्मोस्कोप त्वचा, बाल और नाखूनों की सूक्ष्म संरचनाओं का स्पष्ट अवलोकन करने वाला अत्याधुनिक उपकरण है। इसकी मदद से तिल, मस्से, सोरायसिस, स्कैबीज, स्कैल्प और बालों से जुड़ी बीमारियों की सटीक पहचान संभव हो रही है। उन्होंने बताया कि त्वचा कैंसर की शुरुआती पहचान में भी यह तकनीक बेहद प्रभावी साबित हो रही है।
डर्मोस्कोपी की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा
लाइव डेमो में विशेषज्ञों ने समझाई स्किन डायग्नोसिस की आधुनिक प्रक्रिया
कार्यशाला में देशभर से पहुंचे प्रतिष्ठित त्वचा रोग विशेषज्ञों ने डर्मोस्कोपी तकनीक से जुड़े अपने अनुभव और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी साझा की।

विभिन्न त्वचा रोगों की पहचान की प्रक्रिया को समझाया कर्नाटक से आए डॉ. बालचंद्र एस. अंकद, जो डर्मोस्कोपी सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं, उन्होंने डर्मोस्कोपी की आधुनिक तकनीकों और उनके क्लिनिकल उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। वहीं जम्मू एम्स की डॉ. पायल चौहान ने लाइव डेमो के माध्यम से मरीजों की जांच कर विभिन्न त्वचा रोगों की पहचान की प्रक्रिया को समझाया। विशेषज्ञों ने बताया कि डर्मोस्कोप में उच्च गुणवत्ता वाला आवर्धक लेंस और विशेष प्रकाश व्यवस्था होती है।

डर्मोस्कोपी की जांच से त्वचा की अंदरूनी परतें एपिडर्मिस और डर्मिस अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जिससे रोगों की सटीक पहचान संभव होती है। जोकि जटिल रोगों में काफी मददगार है।
प्रो. डॉ. सत्याकि गांगुली, विभागाध्यक्ष स्किन डिजीज, एम्स रायपुर

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