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विशेष बातचीत}~ सेल्फ केयर ही असली सेल्फ डिफेंस, समाज को लौटाने की सोच बनाती है अंदर से मजबूत: स्मृति कालरा

विशेष बातचीत में स्मृति कालरा ने अपने करियर और सामाजिक अनुभव साझा किए

रायपुर। राजधानी में आयोजित यूनिसेफ के दो दिवसीय नोनी जोहार 4.0 कार्यक्रम का समापन बॉलीवुड एक्ट्रेस स्मृति कालरा की प्रेरक मौजूदगी के साथ हुआ। इस अवसर पर स्मृति ने गर्ल सेफ्टी, यूथ लीडरशिप, मेंटल हेल्थ, सेल्फ डिफेंस और गर्ल राइट्स जैसे विषयों पर खुलकर संवाद किया। उन्होंने कहा कि सेल्फ केयर ही असली सेल्फ डिफेंस है, क्योंकि जब व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होता है, तभी वह समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

कार्यक्रम के दौरान स्मृति ने “जय जोहार, नोनी जोहार” का नारा लगाते हुए कहा कि हम सभी समाज का हिस्सा हैं। जैसे परिवार में हर सदस्य की भूमिका होती है, वैसे ही समाज के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि सिर्फ समाज से लेने की नहीं, बल्कि कुछ लौटाने की भावना ही व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है।

यूनिसेफ के इस कार्यक्रम में 15 जिलों से आए वॉलेंटियर्स की कहानियां सुनकर वे भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ने का साहस दिखाया है और अपने गांवों में बच्चों व महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं। यह एक जेनरेशनल चेंज है, जिसका असर आने वाले समय में दिखेगा।

मेंटल हेल्थ पर खुलकर बोलते हुए स्मृति ने कहा कि महिलाओं के गुस्से और डिप्रेशन को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पहले पोस्टपार्टम डिप्रेशन या हार्मोनल चेंज जैसे विषयों पर बात नहीं होती थी, लेकिन अब समझ बढ़ रही है। हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई कारण होता है, इसे समझना जरूरी है।

अपनी एक्टिंग जर्नी साझा करते हुए स्मृति ने बताया कि उन्होंने नुक्कड़ नाटक से शुरुआत की, थिएटर, रेडियो जॉकी और फिर टीवी व फिल्मों तक का सफर तय किया। उन्होंने शॉर्ट फिल्म अंबू को 48 घंटे में बनाने के अनुभव को चुनौतीपूर्ण लेकिन रोमांचक बताया, जिसमें उन्होंने लेखन, निर्देशन और अभिनय तीनों भूमिकाएं निभाईं।

छत्तीसगढ़ी और रीजनल सिनेमा पर बात करते हुए स्मृति ने कहा कि गुड कंटेंट ही टिकता है। बदलाव में समय लगता है, लेकिन जब कहानी मजबूत होती है तो दर्शक खुद जुड़ते हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि छोटे-छोटे अच्छे काम, जैसे ट्रैफिक में संयम या किसी जरूरतमंद की मदद, भीतर से सुकून देते हैं—और यही असली सफलता है।

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