प्रदेश ही नहीं आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में गरीब मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे
- डॉक्टरों के कुल 305 पद स्वीकृत हैं
- वर्तमान में सिर्फ 190 डॉक्टर
- 115 पद अब भी खाली है
- नर्सिंग, तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ की कमी
- गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं
- मौजूदा कमी प्राथमिकता के आधार पर हो दूर
रायपुर। रायपुर स्थित एम्स में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी का मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में किसी मरीज को समय पर इलाज न मिलना, यह बहुत चिंता का विषय है। वह भी ऐसे संस्थान से जहां पर प्रदेश ही नहीं आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में गरीब मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे है।

सांसद ने बताया कि एम्स रायपुर में डॉक्टरों के कुल 305 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 190 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यानी 115 पद अब भी खाली हैं। एम्स रायपुर में लगातार देखने को मिल रही है, कि जहां गंभीर मरीजों को भी समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। अन्य जगहों पर मरीजों को भेजने की शिकायते मिल रही है।

115 डॉक्टरों के पद खाली
आप बता दें कि एम्स रायपुर में सबसे ज्यादा कमी कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और सर्जरी, रेडियोलॉजी जैसे कई अहम विभागों में है। वहीं नर्सिंग, तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ के कुल 3,884 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 2,387 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1,497 पद खाली पड़े हैं। इसी प्रकार से रजिस्टेशन काउंटर सहित कई अन्य पदों पर आउट सोर्सिंग व संविदा कर्मचारी कार्यरत है, जो मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन करते रहे हैं।
लंबी कतारें, ऑपरेशन में देरी
सांसद ने कहा स्टाफ की कमी या कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी का असर सीधे मरीजों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं। जांच और ऑपरेशन में देरी हो रही है। गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड तक उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
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जल्द खाली पद भरने की मांग
फूलोदेवी नेताम ने केंद्र सरकार से मांग की है कि एम्स रायपुर में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के खाली पदों को जल्द भरा जाए। साथ ही अस्पताल में बेड की संख्या भी बढ़ाई जाए, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने कहा कि एम्स जैसे संस्थान में इस तरह की कमी होना चिंता का विषय है और इसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।
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