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करोड़ों की नौकरी छोड़ बने IPS अधिकारी: यह है सहारनपुर SSP आशीष तिवारी की कहानी

IIT से लंदन-जापान तक, मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में जन्मे आशीष तिवारी एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं

IPS Success Story | UPSC Inspiration | Saharanpur SP Ashish Tiwari

सहारनपुर (उत्तर प्रदेश): कहते हैं कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी मंज़िल मुश्किल नहीं होती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में जन्मे आशीष तिवारी ने, जिन्होंने आईआईटी से पढ़ाई की, फिर लंदन और जापान में करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी की, और आखिरकार देश सेवा के लिए सब कुछ छोड़कर बन गए एक ईमानदार और कर्मठ IPS अधिकारी।

KV से शुरुआत, फिर IIT कानपुर का सफर

26 अगस्त 1983 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में जन्मे आशीष तिवारी एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता कैलाश नारायण तिवारी रेलवे में इंजीनियर थे। आशीष की शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय (KV) से हुई। बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ रहे आशीष ने IIT कानपुर में दाखिला लिया और कंप्यूटर साइंस में B.Tech और M.Tech दोनों की डिग्री हासिल की।

लेहमैन ब्रदर्स और नोमुरा बैंक में चमकी किस्मत

IIT से ग्रेजुएशन के बाद आशीष को लंदन की नामचीन कंपनी लेहमैन ब्रदर्स में इन्वेस्टमेंट बैंकर की नौकरी मिली। शानदार पैकेज और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका मिला। तीन साल बाद वह जापान चले गए और वहां नोमुरा बैंक में एक्सपर्ट एनालिस्ट के तौर पर काम करने लगे।

बड़ी नौकरी लेकिन अधूरी तसल्ली

विदेश में काम करते हुए आशीष ने भले ही करोड़ों की सैलरी कमाई हो, लेकिन दिल को सुकून नहीं मिला। समाज के लिए कुछ करने की चाह हमेशा दिल में बनी रही। इसी चाह ने उन्हें वापस भारत लौटने के लिए प्रेरित किया।

UPSC की राह और IPS बनने का सपना

साल 2010 में आशीष तिवारी भारत लौटे और UPSC की तैयारी शुरू की। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन पाया। प्रशिक्षण के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला और धीरे-धीरे उन्होंने पुलिस सेवा में अपनी अलग पहचान बनाई।

सहारनपुर के SSP, जहां जनता पहले

आज आशीष तिवारी सहारनपुर के SSP हैं और अपने व्यवहार, ईमानदारी और संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने जनता की सुनवाई के लिए विशेष रूप से कुर्सियों की व्यवस्था कराई, जिससे फरियादियों को घंटों खड़े रहने की ज़रूरत नहीं पड़ी। यह छोटी-सी पहल सोशल मीडिया पर काफी सराही गई और वह चर्चा में आ गए।

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प्रेरणा हर युवा के लिए

आशीष तिवारी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सिर्फ पैसे या पद के पीछे नहीं, बल्कि उद्देश्य के साथ जीवन जीना चाहते हैं। उन्होंने दिखाया कि सच्ची सफलता वही है जो समाज के काम आ सके।


निष्कर्ष:

IIT से IPS तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन आशीष तिवारी ने साबित कर दिया कि अगर इरादा नेक हो और मेहनत सच्ची, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं।
वो सिर्फ एक अधिकारी नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए रोल मॉडल हैं।

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