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सुरक्षा की कोई परवाह नहीं : मौसी के बेटे के बर्थडे पर आए थे दो सगे भाई, खेलने के दौरान हीरापुर-जरवाय रोड में खुले पड़े गड्डे में डूबने से मौत

कौन है इस घटना जिम्मेदार:गड्ढे में बारिश का पानी भरा था, बच्चे खेलते-खेलते गिर गए

रायपुर। राजधानी में एक बार फिर बिल्डर्स और ठेकेदार की लापरवाही व जिम्मेदारों की अनदेखी से दो मासूम बच्चों की रविवार की रात गड्ढे में डूबने से मौत हो गई है। यह हादसा कबीरनगर थाना क्षेत्र के हीरापुर-जरवाय रोड में हुआ, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। निर्माणाधीन सड़क के किनारे बने गहरे गड्ढे में आलोक (8 वर्ष) और सत्यम (10 वर्ष) डूब गए। जोकि दोनों सगे भाई मौसी के बेटे के जन्मदिन पर आए हुए थे, लेकिन यह खुशी मौत में बदल गई। स्थानीय लोगों की माने तो यह गड्डा काफी समय से खुला हुआ है।

गड्ढे के पास बच्चों के कपड़े और चप्पल मिले
दोनों बच्चे शाम को खेलते हुए गड्ढे के पास पहुंच थे, जहां बारिश और पाइपलाइन लीकेज के कारण पानी भरा था। जब बच्चे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने तलाश शुरू की। गड्ढे के पास बच्चों के कपड़े और चप्पल मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। रेस्क्यू टीम ने पानी से दोनों के शव निकाले।

लंबे समय से कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा
यह हादसा उस जगह हुआ जहां लंबे समय से कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था, लेकिन प्रशासन और ठेकेदारों ने सुरक्षा की कोई परवाह नहीं की। खुले पड़े गड्ढे में बारिश का पानी भरा था। बच्चे खेलते-खेलते गिर गए।

रेस्क्यू दल ने दोनों के शव बाहर निकाले
स्थानीय लोगों ने बच्चों को बचाने की कोशिश की, लेकिन गहरे पानी में डूबे बच्चों को बचाया नहीं जा सका। मौके पर पहुंचे पुलिस और रेस्क्यू दल ने दोनों के शव बाहर निकाले, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

लोगों का आरोप जोन कमिश्नर की अनदेखी से हादसा
स्थानीय लोगों ने इस त्रासदी के लिए नगर निगम और जोन कमिश्नर को भी जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि इलाके में खुले गड्ढे को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन न तो जोन कमिश्नर ने निरीक्षण किया और न ही निमार्ण कर कंपनी पर कोई कार्रवाई की।

रिंग रोड पर जाम, हत्या का मामला दर्ज करने की मांग
गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने सोमवार सुबह रिंग रोड नंबर-3 पर बड़े पाइप और लोहे के स्टॉपर रखकर चक्काजाम कर दिया। जाम की वजह से टाटीबंध से भनपुरी तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारी जमीन मालिक और बिल्डर कंपनी पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। करीब डेढ़ बजे मौके पर पुलिस अधिकारी पहुंचे, जिन्होंने परिजनों से चर्चा की। इसके बाद अस्थायी रूप से जाम हटाया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर शाम तक मुआवजा और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बच्चों के शवों के साथ दोबारा चक्काजाम करेंगे और तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। करीब दो घंटे बाद पुलिस की समझाइश पर जाम हटाया गया।

पहले भी हो चुके ऐसे दर्दनाक हादसे
यह कोई पहला मामला नहीं है। रायपुर में खुले गड्ढों की लापरवाही कई बार मासूमों की जान ले चुकी है।
सितंबर 2023: रायपुर के लाखेनगर में निर्माणाधीन स्थल पर दो बच्चों — मोहम्मद आवेश और आबिद खत्री — की डूबने से मौत हुई थी।
अप्रैल 2025:गुलमोहर पार्क क्षेत्र में नगर निगम द्वारा खुदवाए गए गड्ढे में तीन बच्चे गिरे, जिनमें 7 वर्षीय दिव्यांश की मौत हो गई थी। हर बार हादसे के बाद जांच और कार्रवाई के वादे हुए, लेकिन जिम्मेदारों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।

मामले की जांच की जा रही है
थाना प्रभारी सुनील दास ने पुष्टि की कि दोनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, और जांच शुरू कर दी गई है। लेकिन सवाल यह है — क्या जांच से लौट आएंगे वो मासूम? लोगों का कहना है कि इस गड्ढे की शिकायत कई बार की गई, पर न नगर निगम ने सुना, न ठेकेदार ने सुध ली। अब जब दो बच्चों की जान चली गई, तब अफसरों की नींद टूटी है।

जनता की मांग है —
— इस मौत के जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदार पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।
—शहर में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की सुरक्षा जांच तुरंत कराई जाए।

व्यवसाय खबर का बड़ा सवाल– —
शहर में कब तक इस तरह की लापरवाही की कीमत मासूमों की जान से चुकाई जाएगी? निगम के महापौर, आयुक्त, जोन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी या स्थानीय पार्षद कब जागेगें। क्या सिर्फ बंद कमरे से ही पूरी जिम्मेदारी संचालित की जाएगी।

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