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रायपुर का ये ‘ब्लू वॉटर पिकनिक स्पॉट आखिर क्यों बन रहा घातक ?

सुरक्षा पर लापरवाही: ब्लू-वॉटर खदान में 9 की मौत के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी

रायपुर।छत्तीसगढ़ अपना 25वां स्थापना दिवस मना रहा है, इन वर्षो में शहर की व्यवस्था से लेकर पर्यटन स्थल को काफी खूबसूरत बनाया गया है। इसी तरह से प्रदेश की राजधानी रायपुर को भी मेट्रो शहरों की तरह ही संवारा जा रहा है। जंगल सफारी हो या फिर मुक्तांगन जैसी दर्शनीय जगहों को सरकार संवारने में जुटी हुई है, लेकिन नया रायपुर के पास ब्लू वॉटर खदान में जिस तरह से डूबने से लोगों की मौते हो रही है, उसे लेकर न तो सरकार सजग है और न ही राजधानी के जिम्मेदार अधिकारी। आप को बता दे कि 2017 से अब तक यहां डूबने से 9 लोगों की मौत हो चुकी है। आइए जानते है नवा रायपुर का यह स्थल आखिर क्यों लोगों के लिए मौत का कारण बन रहा है।

ब्लू-वाटर खदान की इस तरह से बढ़ती गई गहराई
व्यवसायखबरhttps://vyavasaykhabar.com/home/# ने जब इस खदान का दौरा किया तो मौके पर देखा कि वाकई ब्लू-वाटर की सुंदरता में आकर्षण है। वहीं स्थानीय लोगों ने चर्चा के दौरान बताया कि नया रायपुर निर्माण के दौरान बड़ी-बड़ी सड़कें, गार्डन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं। इसके लिए ब्लू-वाटर खदान सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी मात्रा में जमीन से मुरम और पत्थर खुदाई कर निकाला गया है। खुदाई के बाद हुए गड्ढों को खुला छोड़ दिया गया है। जिसे ब्लू-वाटर खदान की गहराई लगभग 350 फीट से अधिक है। जोकि यह गड्ढे अब दिन-ब-दिन खतरनाक होते जा रहे हैं।

दो दिन बाद छात्रों का मिला शव
नवा रायपुर स्थित ब्लू वाटर खदान में छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कू ल के डूबे 2 दसवीं के छात्र का शव 36 घंटे बाद मिला है। घटना 31 अक्टूबर की शाम की है, जब खदान के पानी में नहाने उतरे दोनों बच्चे डूब गए थे। एसडीआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने 2 नवंबर की सुबह शव बरामद कर लिया है।

डूबते देख अन्य छात्रों ने शोर मचाया
जानकारी के मुताबिक, 31 अक्टूबर को टाटीबंध के छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले 9 छात्रों के एक ग्रुप ने ब्लू वाटर खदान में घूमने का प्लान बनाया। सभी बच्चे स्कूल बंक करके स्कूल यूनिफॉर्म में ही घूमने आ गए। इसी बीच दो छात्र जयेश साहू और मृदुल ब्लू वाटर में नहाने उतरे। नहाने के दौरान जयेश और मृदुल गहरे पानी में चले गए और डूब गए। उनके दोस्तों ने जब उन्हें पानी में डूबता देखा, तो शोर मचाया और आसपास के लोगों से मदद मांगी।

क्या राजधानी में बैठे अधिकारी भी जिम्मेदार नहीं
हालांकि इस पूरे मामले में माना पुलिस की टीम जांच कर रही है, लेकिन इस घटना में क्या स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी जिम्मेदार नहीं है। क्योंकि आपको बताते चले कि अभी तक ब्लू-वाटर खदान में डूबने से नौ लोगों की मौत हो चुकी है। जिस प्रकार से राजधानी में यह पिकनिक स्पॉट में तब्दील हो रहा है, उसे ध्यान में रखते हुए मौके पर सुरक्षा की व्यवस्था का ध्यान क्यों नहीं रखा गया ।

केवल औपचारिक दौरा कर लौट गए
खदान के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासन के अधिकारी केवल औपचारिक दौरा कर लौट गए, लेकिन खदान प्रबंधन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब तक प्रशासन खुद मौके पर सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं करेगा, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

ब्लू वाटर खदान में कब-कब हुआ हादसा

2017 में देवेंद्र नगर की 17 साल की सुनैना की डूबने से मौत हो गई।
मई 2019 को दोस्तों के साथ गए 17 साल के मोहन बाघ की डूबने से मौत।
मार्च 2023 को पिकनिक मनाने गए दो दोस्तों की डूबने से मौत हो गई।
जून 2023 को दोस्तों के साथ नहाने गए तीन युवक नदीम, फैजल और शहबाज की मौत हो गई। 
31 अक्टूबर को सीपीएस स्कूल के दो छात्रों की डूबने से मौत हो गई

व्यवसाय खबर की शासन से अपील, निगरानी व्यवस्था करें लागू
स्कूल छात्रों की डूबने सेे मौत के हादसे के बाद व्यवसाय खबर की टीम राजधानी में शासन व जिम्मेदार अधिकारियों से यही उम्मीद जता रही है कि प्रशासन सुरक्षा मानकों की सख्त समीक्षा करें। ब्लू-वॉटर खदान में नए चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा उपकरण तथा निगरानी व्यवस्था लागू करें ।

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