विदेशी तकनीक, विशेष केमिकल और काले नोटों को असली नोटों में बदलने का झूठा प्रदर्शन
बालोद निवासी एवं सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर उमेश कुमार सिन्हा को कंपनी विस्तार के लिए निवेश की आवश्यकता थी
रायपुर।रायपुर। राजधानी में 45 करोड़ रुपये का निवेश दिलाने का झांसा देकर 1.13 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में महाराष्ट्र के नागपुर से गिरोह की दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार गिरोह विदेशी तकनीक, विशेष केमिकल और काले नोटों को असली नोटों में बदलने का झूठा प्रदर्शन कर लोगों का विश्वास जीतकर करोड़ों रुपये की ठगी करता था।

डीसीपी मध्य जोन तारकेश्वर पटेल ने बताया कि बालोद निवासी एवं सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर उमेश कुमार सिन्हा को कंपनी विस्तार के लिए निवेश की आवश्यकता थी। इसी दौरान आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए 45 करोड़ रुपये का निवेश उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। विश्वास बढ़ाने के लिए पीड़ित को चेन्नई और नागपुर बुलाकर कथित विदेशी तकनीक और विशेष केमिकल का प्रदर्शन किया गया। साथ ही काले नोटों को असली नोटों में बदलने का लाइव डेमो दिखाकर उसे अपने झांसे में लिया गया।
1.13 करोड़ के बदले 45 करोड़ के नकली नोट देने का दिया था झांसा
आरोपियों ने कभी विदेशी केमिकल, कभी हाई पावर केमिकल, तो कभी सुरक्षा स्वीकृति और बड़े अधिकारियों की अनुमति का हवाला देकर अलग-अलग किश्तों में कुल 1 करोड़ 13 लाख रुपये वसूल लिए। जब न निवेश मिला और न ही रकम वापस हुई, तब पीड़ित ने थाना तेलीबांधा में शिकायत दर्ज कराई। तकनीकी जांच, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस गिरोह तक पहुंची।
अलग-अलग होटलों में बैठकों के बाद ली गई रकम
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (कोलकाता) और दीपिका पालीवाल (उदयपुर) के रूप में हुई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह पिछले करीब 15 वर्षों से नागपुर, लखनऊ सहित कई राज्यों में इसी तरह की ठगी को अंजाम देता रहा है। आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नकद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड जब्त किए गए हैं। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।


डीसीपी क्राइम एवं साइबर स्मृतिक राजनाला ने बताया कि यह एक सुनियोजित अंतरराज्यीय धोखाधड़ी गिरोह है, जो ‘वॉश एंड वॉश ब्लैक मनी स्कैम’ के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। मामले में अन्य राज्यों की पुलिस से भी समन्वय स्थापित कर गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।







