पहले 105 टन चीनी भेजकर जीता भरोसा, 500 टन के सौदे में एडवांस लेकर नहीं पहुंचाया माल
Special Note: The editorial team of *Vyavsay Khabar* received a copy of the complaint regarding this matter through Rajesh Agarwal, a businessman and complainant from Raipur. The entire report was prepared based on this information. A copy of the complaint is attached for verification purposes.
रायपुर । खमतराई इलाके में चीनी सप्लाई के नाम पर कारोबारी से 1.87 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुणे की एक कंपनी और उसके प्रतिनिधियों ने 500 टन चीनी देने का झांसा देकर एडवांस राशि ली, लेकिन तय समय पर माल नहीं भेजा।
पीड़ित कारोबारी राजेश अग्रवाल की शिकायत पर खमतराई पुलिस ने नाथबाबा एग्रो ट्रेड हब प्राइवेट लिमिटेड, पुणे के प्रतिनिधियों समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कंपनी, राजीव मोरे, रफीक बाबा शेख, मिनोज बाबा शेख और गजाला शेख के खिलाफ मामला दर्ज कर बैंक लेनदेन, दस्तावेजों और खातों की जांच शुरू कर दी है।
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सप्लाई समय पर कर कंपनी ने विश्वास हासिल कर लियापुलिस के अनुसार, श्रीनगर रोड स्थित सिंघल प्रोविजन स्टोर्स के संचालक राजेश अग्रवाल थोक शक्कर का कारोबार करते हैं। फरवरी 2025 में उनकी पहचान खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताने वाले राजीव मोरे से हुई थी। शुरुआत में कारोबारी ने 35 टन और फिर 70 टन चीनी का ऑर्डर दिया, जिसकी सप्लाई समय पर कर कंपनी ने विश्वास हासिल कर लिया।
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1 करोड़ 87 लाख 48 हजार 667 रुपए जमा कर दिएइसके बाद 17 फरवरी 2025 को करीब 500 टन चीनी का बड़ा सौदा तय हुआ। कंपनी ने स्टॉक उपलब्ध होने और एडवांस भुगतान मिलते ही माल भेजने का भरोसा दिलाया। कारोबारी ने 17 से 21 फरवरी के बीच आरटीजीएस के जरिए कंपनी के खाते में 1 करोड़ 87 लाख 48 हजार 667 रुपए जमा कर दिए।
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ट्रक नंबरों में कोई माल लोड ही नहीं किया गया थाराशि मिलने के बाद कंपनी ने जीएसटी इनवॉयस और ई-वे बिल भेजकर ट्रक रवाना होने की जानकारी दी, लेकिन कई दिन बाद भी माल नहीं पहुंचा। जांच कराने पर पता चला कि भेजे गए ट्रक नंबरों में कोई माल लोड ही नहीं किया गया था।

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ट्रांसपोर्ट जानकारी और डिलीवरी प्रूफ उपलब्ध नहीं करायाशिकायत के मुताबिक, दस्तावेज मांगने पर कंपनी ने लारी रसीद, ट्रांसपोर्ट जानकारी और डिलीवरी प्रूफ उपलब्ध नहीं कराया। बाद में कंपनी संचालक ने राजीव मोरे को केवल ब्रोकर बताया और उससे संपर्क करने को कहा। इसके बाद राजीव मोरे का मोबाइल बंद हो गया।
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