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“Asha’s: स्वाद की भी जादूगरनी Asha Bhosle — खुद तैयार किए मसालों से 5 देशों में 14 रेस्टोरेंट तक खड़ा किया बड़ा बिज़नेस”

मुंबइ डेस्क। भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपनी आवाज से सात दशक तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। 10 साल की उम्र में पहला गाना गाने वाली आशा का सिंगिंग करियर 82 साल का रहा, जिसमें उन्होंने 12 हजार से ज्यादा गाने गाए। आशा का आखिरी गाना 2026 में रिलीज हुआ।

1947 में एक रिकॉर्डिस्ट ने आशा भोसले की आवाज को ‘खराब’ कहकर रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आशा ने संघर्ष जारी रखा और हिंदी-मराठी समेत 20 भाषाओं में गाने गाकर अपना नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराया।



मुंबई में यादगार मुलाकात: पहली बार में ही अपनापन

मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरानवरिष्ठ पत्रकार और आत्मकथा लेखक पंकज दुबे की मुलाकात सुरों की महान साधिका आशा भोसले से हुई। इस मुलाकात को याद करते हुए पंकज दुबे ने बताया कि यह उनकी पहली भेंट थी, लेकिन बातचीत के दौरान ऐसा बिल्कुल महसूस नहीं हुआ।

उन्होंने कहा, “ऐसा लगा जैसे हम कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते हों। बातचीत बेहद आत्मीय और सहज रही, जिसमें संगीत, जीवन और अनुभवों जैसे कई विषयों पर चर्चा हुई।”

आशा भोसले, जिन्हें भारतीय संगीत जगत की सबसे बहुमुखी आवाज़ों में गिना जाता है, ने दशकों तक अपनी गायकी से हर पीढ़ी के दिलों पर राज किया है। रोमांटिक गीतों से लेकर ग़ज़ल, पॉप, शास्त्रीय और फिल्मी संगीत तक—उन्होंने हर शैली में अपनी अलग पहचान बनाई है।

लंबे समय तक स्मृतियों में बनी रहेगीउनकी आवाज़ ने न केवल गीतों को जीवंत बनाया, बल्कि उन्हें अमर भी कर दिया। यही कारण है कि आज भी उनका संगीत श्रोताओं के दिलों में उसी ताजगी के साथ गूंजता है। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक परिचय नहीं थी, बल्कि दो संवेदनशील व्यक्तित्वों के बीच एक यादगार संवाद बन गई, जो लंबे समय तक स्मृतियों में बनी रहेगी।

गीतों को अपनी आवाज़ से अमर बना दिया भारतीय संगीत जगत की एक ऐसी आवाज़ हैं, जिसने दशकों तक हर पीढ़ी के दिलों पर राज किया है। अपनी बहुमुखी गायकी और अनोखे अंदाज़ के लिए मशहूर आशा भोसले ने रोमांटिक, ग़ज़ल, पॉप, क्लासिकल और फिल्मी हर तरह के गीतों को अपनी आवाज़ से अमर बना दिया।

उन्होंने हज़ारों गाने गाकर न सिर्फ हिंदी सिनेमा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। उनकी ऊर्जा, प्रयोग करने की क्षमता और हर दौर में खुद को ढाल लेने का हुनर उन्हें बाकी गायकों से अलग बनाता है। आज भी जब उनके गीत सुनाई देते हैं, तो लगता है जैसे संगीत का सुनहरा दौर फिर से जीवंत हो उठा हो।

‘Asha’s’ नाम से एक वैश्विक रेस्टोरेंट चेन का साम्राज्य भी खड़ा किया

वह न केवल संगीत की दुनिया की बेताज महारानी थीं, बल्कि उन्होंने ‘Asha’s’ नाम से एक वैश्विक रेस्टोरेंट चेन का साम्राज्य भी खड़ा किया है. यह लेख उनके संगीत सफर, उनके खाना पकाने के प्रति जुनून और दुबई से लेकर यूके तक फैली उनकी सफल बिजनेस यात्रा का एक विस्तृत विवरण पेश करता है.

एक चमकता हुआ अध्याय आज समाप्त हो गयाभारतीय संगीत और संस्कृति का एक चमकता हुआ अध्याय आज समाप्त हो गया. अपनी जादुई और खनकती आवाज से 8 दशकों तक दुनिया भर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाली महान गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं. रविवार का दिन न केवल बॉलीवुड के लिए, बल्कि दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए शोक की लहर लेकर आया.आशा जी के जीवन का दूसरा सबसे बड़ा पहलू उनका खाना पकाने के प्रति प्रेम था. संगीत के बाद भोजन ही उनकी दूसरी सबसे बड़ी पसंद थी.

रेस्टोरेंट चेन की प्रेरणाआशा जी अक्सर अपने बचपन को याद करते हुए बताती थीं कि उनके पिता की ‘थिएटर कंपनी’ जब एक शहर से दूसरे शहर जाती थी, तो सभी कलाकार एक साथ बैठकर भोजन करते थे. रसोई में बड़े-बड़े बर्तनों में बनते खाने की खुशबू और लोगों के चेहरों पर तृप्ति के भाव देखकर ही उनके मन में कुकिंग के प्रति आकर्षण पैदा हुआ. उन्होंने एक बार कहा था, “जब मैं शेफ कोट पहनती हूं, तो मुझे लगता है जैसे मैंने कोई बहुत सुंदर ड्रेस पहनी हो.”

दुबई से हुई अंतरराष्ट्रीय शुरुआत

साल 2002 में दुबई के वाफी सिटी मॉल (WAFI City Mall) में पहले ‘Asha’s’ रेस्टोरेंट की नींव रखी गई. यह किसी सेलिब्रिटी के नाम पर आधारित सिर्फ एक रेस्टोरेंट नहीं था, बल्कि एक गंभीर बिजनेस वेंचर था. पिछले 22 सालों में यह ब्रांड एक वैश्विक पहचान बन चुका है.

स्वाद का राज: आशा जी का खास मसाला

Asha’s रेस्टोरेंट की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसकी प्रमाणिकता (Authenticity) है. आशा जी केवल नाम के लिए इस रेस्टोरेंट से नहीं जुड़ी थीं.

खुद निगरानी: वह मुंबई में बैठकर अपने परिवार की पुरानी रेसिपी के आधार पर ‘गरम मसाला’ तैयार करवाती थीं. यह मसाला चक्कियों पर उनके सामने पीसा जाता था और फिर सभी अंतरराष्ट्रीय शाखाओं में भेजा जाता था.

सांगली में जन्म, पिता शास्त्रीय गायक रहेआशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। घर में संगीत का माहौल शुरू से ही था। उनके भाई-बहन लता मंगेशकर, मीना खडीकर, उषा मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीत की दुनिया से ही जुड़े रहे।जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब 1942 में उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। इससे परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा ने कम उम्र में गाना और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया था।

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