रायपुर। स्वावलंबी भारत अभियान-छत्तीसगढ़ के फेलोशिप कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर चयनित फेलोज़ का स्वागत करते हुए उन्हें अभियान की मूल भावना, उद्देश्य, कार्ययोजना और आगामी दायित्वों की विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने इसे केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम के तहत फेलोज़ को स्वदेशी विचार, सामाजिक नेतृत्व, आर्थिक आत्मनिर्भरता और जनजागरूकता से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभियान का उद्देश्य ऐसे युवाओं का नेतृत्व तैयार करना है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों, स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता के विचार को जन-जन तक पहुंचा सकें।
26 जून को ऑनलाइन मार्गदर्शन बैठक
फेलोशिप कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित प्रतिभागियों के लिए 26 जून 2026 (शुक्रवार) शाम 4:30 बजे ऑनलाइन बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में अभियान के प्रांत समन्वयक जगदीश पटेल फेलोज़ को आगामी कार्ययोजना, अध्ययन प्रक्रिया, अपेक्षित दायित्वों और कार्यक्रम के विस्तार की जानकारी देंगे। साथ ही अभियान की कार्यप्रणाली और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

सभी चयनित फेलोज़ से बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने और पूर्व में उपलब्ध कराई गई अध्ययन सामग्री का गंभीरता से अध्ययन कर सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। अभियान ने स्पष्ट किया है कि फेलोशिप के आगामी चरणों की जानकारी केवल उन्हीं प्रतिभागियों को दी जाएगी, जो नियमित रूप से बैठकों में शामिल होंगे और सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
आयोजकों ने कहा कि स्वावलंबी भारत अभियान का लक्ष्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नेतृत्व के रूप में तैयार करना है। अभियान का मानना है कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब युवा वर्ग स्वदेशी सोच, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के साथ आगे आएगा।
कार्यक्रम के अंत में चयनित सभी फेलोज़ को शुभकामनाएं देते हुए उनसे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अभियान से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। “स्वावलंबन ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है” के संदेश के साथ कार्यक्रम को नई शुरुआत का प्रतीक बताया गया।






