व्यवसाय खबर.कॉम पूछता है सवाल: आखिर बेजुबानों की सुध कौन लेगा?
रायपुर। फुंडहर गौठान में बारिश के बीच मृत गायों के शव लावारिस पड़े होने का मामला सामने आया है। शनिवार को नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने जोन-9 के वार्ड-51 स्थित गौठान का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने गौठान की व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल सुधार की मांग की।

शवों का समय पर निस्तारण तक नहीं किया जा रहातिवारी के अनुसार, फुंडहर गौठान की क्षमता करीब 260 से 280 गोवंश रखने की है, जबकि यहां 600 से अधिक गोवंश मौजूद हैं। क्षमता से दोगुने से ज्यादा पशु होने के कारण जगह की कमी के साथ चारा-पानी और पशु चिकित्सा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बारिश के बीच मृत गोवंश के शवों का समय पर निस्तारण तक नहीं किया जा रहा है।

गौ रक्षा के दावों पर उठाए सवाल तिवारी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर गौ रक्षा की बात की जाती है, वहीं गौठान में गोवंश बदहाल स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद पीड़ादायक स्थिति है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना चाहिए।
सभी गौठानों की जांच की मांग नेता प्रतिपक्ष ने रायपुर के सभी नगर निगम गौठानों की जांच कराने, क्षमता से अधिक गोवंश को दूसरे गौठानों में शिफ्ट करने तथा चारा, पानी, शेड, सफाई और पशु चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने निगम प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि व्यवस्था नहीं सुधरी तो कांग्रेस सड़क से लेकर नगर निगम सदन तक आंदोलन करेगी।
सबसे बड़ा सवाल—इन बेजुबान मवेशियों की फरियाद आखिर कौन सुनेगा?
फुंडहर गौठान की बदहाल तस्वीरें व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं। क्षमता से दोगुने से ज्यादा मवेशी हैं तो जिम्मेदार अधिकारी अब तक खामोश क्यों हैं? क्या उन्हें गौठान की जमीनी स्थिति की जानकारी नहीं है? बारिश के बीच मृत मवेशियों के शव पड़े रहने के बावजूद जिम्मेदारों की नजर वहां क्यों नहीं पहुंची?
जब चारा, पानी, जगह और इलाज तक पर्याप्त नहीं है, तो 600 से ज्यादा मवेशियों को वहां रखने का फैसला किसने लिया?
गौसेवा केवल जयकारों और नारों तक सीमित क्यों है? अगर गाय को माता कहते हैं, तो उसकी पीड़ा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? सिर्फ जयकारा लगाने से आशीर्वाद मिलेगा या बेजुबानों की सेवा भी करनी होगी?








