कांग्रेस ने पूछा- क्या अब सरकारी स्कूलों के परीक्षा पर्चे भी होंगे कॉर्पोरेट प्रायोजित?
रायपुर। जुलाई 2026 में कक्षा 10वीं के विज्ञान विषय के मासिक यूनिट टेस्ट केप्रश्नपत्र पर अडानी फाउंडेशन का लोगो छपने के बाद रायपुर में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्नपत्र के एक हिस्से में रायपुर जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग का नाम व लोगो दर्ज है, जबकि दूसरी ओर अडानी फाउंडेशन का लोगो दिखाई दे रहा है। “Adani’s logo on question paper; politics over education intensifies” “Congress raises questions”

कॉर्पोरेट हस्तक्षेप और ब्रांडिंग को लेकर सवालहालांकि, विवाद इस बात को लेकर है कि सरकारी परीक्षा से जुड़े प्रश्न पत्र, जिन्हें प्रशासनिक और गोपनीय दस्तावेज माना जाता है, उन पर किसी निजी औद्योगिक समूह का लोगो प्रकाशित किया गया। इसे लेकर शिक्षा व्यवस्था में कॉर्पोरेट हस्तक्षेप और ब्रांडिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

निजी ब्रांड के प्रचार से जोड़ते हुए सवाल उठाएमामला सामने आने के बाद विपक्ष और कांग्रेस नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। नेताओं का सवाल है कि क्या अब सरकारी स्कूलों में होने वाली परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भी कॉर्पोरेट प्रायोजन के तहत तैयार किए जाने लगे हैं। उन्होंने इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में निजी ब्रांड के प्रचार से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।

पीपीपी मॉडल के तहत सहयोगात्मक कार्यों का हिस्सावहीं, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत सहयोगात्मक कार्यों का हिस्सा है। सूत्रों का कहना है कि निजी संस्थाओं के सहयोग से शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
निजी क्षेत्र की भागीदारी और उसके स्वरूप को लेकर नई बहस छेड़ दीप्रश्नपत्र पर निजी संस्था का लोगो इस्तेमाल किए जाने को लेकर अब प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर सभी की नजर है। मामले ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी और उसके स्वरूप को लेकर नई बहस छेड़ दी है।













