गाय एक अनुसंधान’ पुस्तक का विमोचन
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में गौ-आधारित जैविक कृषि और ‘प्रेम की खेती’ विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, कृषक प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों ने सतत एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) सुरेश कुमार चंद्रवंशी रहे, जबकि मुख्य वक्ता कृषि वैज्ञानिक एवं जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अजीत केलकर ने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉ. अखिल जैन ने अतिथियों, कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को ‘गाय एक अनुसंधान’ पुस्तक भेंट की। कार्यक्रम में अनुसंधान निदेशक डॉ. विवेक त्रिपाठी, सह-अनुसंधान निदेशक डॉ. धनंजय शर्मा, जैविक कृषि विशेषज्ञ डॉ. सुनील अग्रवाल, कृषि वैज्ञानिक मनमंथ शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।

मुख्य वक्ता अजीत केलकर ने गौ-आधारित प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, वर्मी कंपोस्ट, पंचगव्य और गौमूत्र अर्क के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “स्वयं का बीज, स्वयं की खाद, स्वयं की दवाई, स्वयं का अनाज और स्वयं का बाजार” का संकल्प किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि जैविक और सतत कृषि पद्धतियों से भूमि की उर्वरता बढ़ती है और खेती की लागत में कमी आती है। उन्होंने गौ-आधारित कृषि मॉडल को प्रदेश के किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में खैरागढ़ क्षेत्र में गौ-आधारित कृषि एवं अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई और इसे छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की बात कही गई।






