“विश्वगुरु बनना है तो संस्कारों की ओर लौटना होगा”, युवाओं की शिक्षा, सनातन, चरित्र निर्माण और सामाजिक मूल्यों पर खुलकर रखे विचार
रायपुर, 12 जुलाई। रायपुर प्रेस क्लब के लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम “हमर पहुना” में प्रख्यात कथावाचक एवं आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन धर्म, शिक्षा, युवाओं के संस्कार, सामाजिक मूल्यों और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने देश में “सनातन बोर्ड” के गठन की मांग करते हुए संसद और विधानसभाओं में धर्माचार्यों के लिए 50 सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया। राम मंदिर पर भी दिया बयान राम मंदिर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन को लेकर उनका व्यक्तिगत मानना है कि भविष्य में कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है।

इस अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि “हमर पहुना” कार्यक्रम का उद्देश्य समाज, संस्कृति, साहित्य, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशिष्ट व्यक्तित्वों को पत्रकारों के बीच संवाद के लिए आमंत्रित करना है, ताकि समसामयिक विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके। उन्होंने देवकीनंदन ठाकुर के रायपुर आगमन पर उनका आभार भी व्यक्त किया।
कार्यक्रम में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। कथा आयोजक योगेश अग्रवाल भी उपस्थित रहे।
पत्रकारों से चर्चा के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और संस्कारों की ओर लौटना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को गीता, महाभारत और भारतीय संस्कृति का अध्ययन कराया जाना चाहिए, जिससे उनमें सत्यनिष्ठा, नैतिकता और चरित्र का विकास हो सके।
उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती हिंसा, अपराध और पारिवारिक विघटन जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए संस्कार आधारित शिक्षा और चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को भारतीय सामाजिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं बताते हुए पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया।
सनातन बोर्ड की मांग
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश में सनातन बोर्ड का गठन होना चाहिए, जो मंदिरों, गुरुकुलों और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रभावी ढंग से कार्य करे। उन्होंने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग धर्म, शिक्षा, गौ संरक्षण और समाजहित के कार्यों में अधिक प्रभावी तरीके से किया जाना चाहिए।
शिक्षा में संस्कारों पर जोर
उन्होंने कहा कि स्कूलों में केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का भी समावेश होना चाहिए। उनके अनुसार बच्चों को बॉलीवुड गीतों की बजाय सावित्री, सीता और रानी लक्ष्मीबाई जैसे प्रेरणादायी चरित्रों से परिचित कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण के मार्गदर्शक भी होने चाहिए।
धर्मांतरण और सामाजिक मुद्दों पर राय
धर्मांतरण के विषय पर उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा किसी पर धर्म परिवर्तन का दबाव नहीं बनाती, लेकिन विभिन्न माध्यमों से होने वाले धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने युवाओं से गीता का अध्ययन करने का आह्वान किया ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
सदन में धर्माचार्यों के लिए 50 सीटों का सुझाव
राजनीतिक व्यवस्था पर अपनी राय रखते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में धर्माचरण और नैतिक मूल्यों का पालन करने वाले लोगों की संख्या बढ़नी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि धर्माचार्यों के लिए 50 सीटें आरक्षित किए जाने पर विचार होना चाहिए। उनके अनुसार सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान मिलने से भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।








