रायपुर, 14 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति ने पुराने सर्किट हाउस में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों के साथ परामर्श बैठक की। समिति के सदस्य एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और ज्योतिरानी सिंह ने विवाह-तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, संपत्ति, वसीयत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर सुझाव प्राप्त किए।

बैठक में आदिवासी प्रतिनिधियों ने अपनी रूढ़िगत परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से अलग रखने का अनुरोध किया। वहीं मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, गोंडवाना और सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर अपने विचार रखे।

समिति ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि प्राप्त विचारों और व्यावहारिक पहलुओं का विश्लेषण कर समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में विचार किया जाएगा।
समान नागरिक संहिता पर महिला समूहों ने रखे सुझाव, लिव-इन पंजीयन अनिवार्य करने की मांग
रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर रायपुर जिले के धरसींवा और गरियाबंद जिले से पहुंचीं महिला स्व-सहायता समूहों की पदाधिकारियों ने समिति के समक्ष विभिन्न सुझाव रखे। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य करने, पैतृक संपत्ति में महिलाओं को समान अधिकार देने और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया सरल बनाने की मांग की।
बैठक में समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के सुझाव सुने।
सीता साहू, बुद्धि साहू, टेमेश्वरी साहू, रेखा साहू और राजेश्वरी बाई सहित महिलाओं ने कहा कि लिव-इन पंजीयन से महिलाओं के शोषण पर रोक लगाने तथा बच्चों के पालन-पोषण और उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
वहीं, लक्ष्मी साहू, सुरेखा रात्रे, दिलेश्वरी मिर्जा और अन्य महिलाओं ने धर्म आधारित कानूनों में समानता सुनिश्चित करने तथा दहेज संबंधी नियमों में एकरूपता लाने पर जोर दिया।
महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करने के साथ कानून का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की बात कही। समिति ने व्यावहारिक सुझावों को रिपोर्ट में शामिल करने का आश्वासन दिया।








