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खेत बचाओ अभियान के तहत पश्चिम सियांग में वैज्ञानिक–किसान संवाद, प्राकृतिक खेती पर दिया गया जोर

वरिष्ठ वैज्ञानिक ((शस्य विज्ञान)) डॉ. संजय कुमार पांडेय ने कृषि विविधीकरण को सतत कृषि विकास के लिए आवश्यक बताया

बासर, 23 जून। आईसीएआर-कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), पश्चिम सियांग, बासर एवं आईसीएआर अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर क्षेत्र, अरुणाचल प्रदेश केंद्र, बासर के संयुक्त तत्वावधान में “खेत बचाओ अभियान, उर्वरकों का संतुलित उपयोग एवं प्राकृतिक खेती प्रणाली” विषय पर वैज्ञानिक–प्रसार–किसान संवाद कार्यक्रम का आयोजन दोजी डेके एवं लिरोमोबा गांवों में किया गया। कार्यक्रम में कुल 56 किसानों ने भाग लिया, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत महिला किसान शामिल थीं।

केंद्र सरकार की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दीकार्यक्रम का शुभारंभ आईसीएआर-केवीके पश्चिम सियांग के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मनोज कुमार के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने “स्वस्थ मिट्टी–स्वस्थ फसल–समृद्ध किसान” थीम के तहत खेत बचाओ अभियान की महत्ता बताते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती, एजोला उत्पादन, दलहन आधारित कृषि प्रणाली तथा केंद्र सरकार की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी।

आईसीएआर एपी सेंटर, बासर के वरिष्ठ वैज्ञानिक ((शस्य विज्ञान)) डॉ. संजय कुमार पांडेय ने प्राकृतिक खेती, हरित खाद, मृदा परीक्षण, दलहन एवं तिलहन मिशन तथा बाजरा आधारित कृषि प्रणालियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा कृषि विविधीकरण को सतत कृषि विकास के लिए आवश्यक बताया।

वहीं, वरिष्ठ वैज्ञानिक (पशु प्रजनन एवं स्त्री रोग विज्ञान) डॉ. बिनोद कुमार दत्ता बोराह ने पशुपालन, एकीकृत कृषि प्रणाली तथा कृषि अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को पोषण सुरक्षा एवं अतिरिक्त आय के लिए पशुपालन अपनाने की सलाह दी।

पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण उपायों की जानकारी दीदोजी डेके गांव में कृषि विभाग, आलो के कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) ने एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) विषय पर व्याख्यान देते हुए रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों तथा पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण उपायों की जानकारी दी।

किसानों ने कार्यक्रम की सराहनाकार्यक्रम के दौरान आयोजित किसान–वैज्ञानिक संवाद सत्र में किसानों ने अपनी खेती से जुड़ी समस्याएं विशेषज्ञों के समक्ष रखीं और वैज्ञानिक समाधान प्राप्त किए। किसानों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे उपयोगी कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।

7 वर्मी कम्पोस्ट बेड भी वितरित किए गएइस अवसर पर किसानों को जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 7 वर्मी कम्पोस्ट बेड भी वितरित किए गए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मनोज कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। समापन सत्र में लिरुम गांव की जीपीएम श्रीमती गोसेन रोमिन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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