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रामगढ़ संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, सीताबेंगरा, जोगीमारा गुफा और हाथीपोल का किया अवलोकन

रायपुर, 30 जून। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा, प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का अवलोकन कर क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाता है।

उन्होंने कहा कि रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इन धरोहरों को संरक्षित करने, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने तथा देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक संसाधनों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन संस्कृति, इतिहास और पुरातात्विक धरोहरों के कारण भी देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। उन्होंने लोगों से इन धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

कालिदास और मेघदूतम् से जुड़ी है रामगढ़ की ऐतिहासिक पहचान

रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख और चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति ‘मेघदूतम्’ की रचना की थी। इसी साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ माह के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

करीब 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच को विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला माना जाता है, जबकि जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्र और शिलालेख भारतीय कला और इतिहास की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं।

हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र

रामगढ़ की एक और विशेष पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची यह सुरंग अपनी प्राकृतिक संरचना के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएँ इस पूरे क्षेत्र के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन महत्व को और बढ़ा देती हैं।

समारोह में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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