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लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

आपातकाल स्मृति दिवस पर सेनानियों का सम्मान, ‘आपातकाल के योद्धा’ स्मारिका का विमोचन

रायपुर, 28 जून। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कठिन दौर था, लेकिन लोकतंत्र सेनानियों के साहस, संघर्ष और त्याग ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि इन सेनानियों का बलिदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है और लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी भी। मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित आपातकाल स्मृति दिवस एवं लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित कियामुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका ‘आपातकाल के योद्धा’ का विमोचन किया और राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बड़ी कुर्बानियों के बाद मिली है। इसलिए युवाओं को इतिहास के उन अध्यायों से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि वे लोकतांत्रिक अधिकारों और कर्तव्यों के महत्व को समझ सकें। उन्होंने इस विषय को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की सराहना की।

आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रहेमुख्यमंत्री ने अपने पारिवारिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रहे। उन्होंने कहा कि उस समय हजारों परिवारों ने आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना किया। लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों तक स्वयंसेवक भेष बदलकर भोजन और आवश्यक सामग्री पहुंचाते थे। यह त्याग और समर्पण भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का अमिट अध्याय है।

भारत अपनी सांस्कृतिक विरासतकार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल संविधान की व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला जीवन दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के बल पर विश्व में अपनी पहचान को और सशक्त बना सकता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने तथा अनुशासन, स्वच्छता और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

1975 का आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार थाविधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि 1975 का आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार था। प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान में किए गए बदलाव आज भी लोकतंत्र की रक्षा के प्रति सजग रहने का संदेश देते हैं। इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, जनप्रतिनिधि, लोकतंत्र सेनानी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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