टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रमाण-आधारित तकनीकी अनुशंसाएँ विकसित करना है
रायपुर, छत्तीसगढ़। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा खरीफ मौसम में धान फसल के लिए नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक एवं नैनो बोरॉन के वैज्ञानिक उपयोग पर उन्नत फील्ड परीक्षण संचालित किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रमाण-आधारित तकनीकी अनुशंसाएँ विकसित करना है।
संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय के मार्गदर्शन में चल रहे इन परीक्षणों में नैनो उर्वरकों एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके साथ ही अनुसंधान प्रक्षेत्र में किसानों, कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों को नैनो उर्वरकों के सुरक्षित एवं संतुलित उपयोग, सही मात्रा, उचित समय तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की जानकारी भी दी जा रही है।

परियोजना प्रमुख एवं संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित ने कहा कि भारत सरकार की सतत एवं प्राकृतिक संसाधन आधारित कृषि नीति के अनुरूप आईसीएआर-एनआईबीएसएम धान उत्पादन में नैनो उर्वरकों की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर रहा है। उन्होंने कहा कि “जैविक स्रोतों के साथ नैनो उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग मृदा स्वास्थ्य सुधारने, पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने, पर्यावरण संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
वैज्ञानिक परीक्षणों के प्रमुख बिंदु
- धान की पौध की जड़ों का नैनो डीएपी से उपचार तथा सक्रिय कल्ले (Active Tillering) अवस्था में नैनो यूरिया के पर्णीय छिड़काव के माध्यम से पोषक तत्व उपयोग दक्षता, पौध वृद्धि और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता में संभावित कमी का अध्ययन किया जा रहा है।
- नैनो जिंक की प्रभावशीलता क्लोरोफिल निर्माण बढ़ाने एवं खैरा रोग की रोकथाम में तथा नैनो बोरॉन की भूमिका पुष्पन, बालियों के विकास, दानों के भराव एवं गुणवत्ता सुधार में परखी जा रही है।
- परीक्षणों में पौधों द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण, कीट एवं रोगों के प्रति सहनशीलता, पौध वृद्धि, उपज एवं गुणवत्ता पर नैनो उर्वरकों के प्रभावों का भी विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
आईसीएआर-एनआईबीएसएम का मानना है कि इन वैज्ञानिक परीक्षणों से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में धान की खेती के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, लागत-कुशल एवं पर्यावरण-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन तकनीकों के विकास का आधार बनेंगे। यह पहल देश में संतुलित पोषण प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि तथा टिकाऊ धान उत्पादन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।







