4,500 वर्ष पुरानी समुद्री सभ्यता से रूबरू कराएगा लोथल का राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर
लोथल (गुजरात), 21 जुलाई। भारत की 4,500 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत और हड़प्पा सभ्यता की गौरवशाली परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया के सामने लाने के लिए गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) विकसित किया जा रहा है। पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के मीडिया अध्ययन दौरे के तहत छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अवलोकन किया।
नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज म्यूजियम के महाप्रबंधक अमित राठौड़ ने बताया कि लगभग 400 एकड़ में विकसित हो रहा यह परिसर केवल संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन से आधुनिक समुद्री यात्रा को अनुभवात्मक रूप में प्रस्तुत करने वाला वैश्विक विरासत केंद्र होगा। यहां संग्रहालय के साथ हड़प्पाई नगर का पुनर्निर्माण, तटीय राज्यों के पवेलियन, जेट्टी, जलमार्ग, थीम पार्क, लाइटहाउस म्यूजियम, 5-डी डोम थिएटर, म्यूजोटेल और इको-रिसॉर्ट जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि संग्रहालय में 14 विषयगत दीर्घाओं के माध्यम से हड़प्पा सभ्यता, प्राचीन समुद्री व्यापार, भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, पारंपरिक जहाज निर्माण, जलवायु परिवर्तन और दक्षिण-पूर्व एशिया से भारत के समुद्री संबंधों सहित विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। परिसर में जीवन-आकार के हड़प्पाई नगर का पुनर्निर्माण भी किया जा रहा है, जहां आगंतुक 4,500 वर्ष पुराने नगर नियोजन, बाजार और जल निकासी व्यवस्था का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे।
परियोजना के तहत संग्रहालय को जलमार्ग और जेट्टी से जोड़ने, साउंड एंड लाइट शो, समुद्री थीम आधारित पर्यटन सुविधाओं और तटीय राज्यों के सांस्कृतिक पवेलियन विकसित करने्री सभ्यता, संस्कृति और इतिहास को आधुनिक तकनीक, शिक्षा और पर्यटन से जोड़ने का महत्वपूर्ण की भी योजना है। भारत की समुद्री विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 35 देशों के साथ सहयोग प्रस्तावित है।

अमित राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” विजन के अनुरूप यह परियोजना भारत की समुद्री सभ्यता, संस्कृति और इतिहास को आधुनिक तकनीक, शिक्षा और पर्यटन से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। पूर्ण होने पर लोथल देश के प्रमुख विरासत एवं समुद्री पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा।







