अहमदाबाद, 21 जुलाई। भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को नई गति देने की दिशा में गुजरात का साणंद क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। यहां सीजी सेमी (CG Semi) की दो अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों में करीब 7,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। दोनों संयंत्रों के पूरी क्षमता से संचालित होने पर इनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 4 अरब सेमीकंडक्टर चिप्स होगी। यह जानकारी सीजी सेमी के चेयरमैन कार्यालय के वाइस प्रेसिडेंट संदीप कुमार सेन ने छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के अध्ययन दौरे के दौरान दी।

उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन कार्य का लगभग 20 प्रतिशत योगदान देता है और अब देश विनिर्माण क्षेत्र में भी तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सीजी सेमी ने जापान की रेनेसास (Renesas) के साथ तकनीकी साझेदारी की है और कंपनी चिप डिजाइन, असेंबली एवं टेस्टिंग के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
परियोजना की प्रमुख बातें
- कंपनी: सीजी सेमी (CG Semi)
- स्थान: साणंद, गुजरात
- कुल निवेश: करीब ₹7,500 करोड़
- उत्पादन क्षमता: सालाना 4 अरब सेमीकंडक्टर चिप्स
- तकनीकी साझेदार: जापान की Renesas
- फोकस: चिप डिजाइन, असेंबली और टेस्टिंग
- उपयोग: ऑटोमोटिव, औद्योगिक और IoT सेक्टर
- सरकारी सहायता: केंद्र 50% और राज्य 20% तक
- स्थिति: व्यावसायिक उत्पादन शुरू, भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मिलेगी नई मजबूती।
साणंद में स्थापित दोनों इकाइयां लगभग एक लाख वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित की जा रही हैं, जिनमें 40 हजार वर्गमीटर क्लीन रूम बनाया गया है। सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अत्यधिक स्वच्छ और नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है, इसलिए उत्पादन प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और कड़े गुणवत्ता मानकों का पालन किया जा रहा है।

संदीप सेन ने बताया कि परियोजना को केंद्र सरकार से 50 प्रतिशत तथा राज्य सरकार से 20 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता मिल रही है। गुजरात में उद्योगों के लिए प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, सिंगल विंडो सिस्टम, गुणवत्तापूर्ण बिजली, शुद्ध जल और मजबूत बुनियादी ढांचा निवेश को गति दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाले कई विशेष रसायन और उपकरण फिलहाल आयात किए जाते हैं, लेकिन गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से भविष्य में घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने की उम्मीद है।

सीजी सेमी के मानव संसाधन प्रमुख जोसेफ प्रेमराज ने बताया कि कंपनी ऑटोमोटिव, औद्योगिक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) क्षेत्र के लिए चिप्स का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रशिक्षित इंजीनियर और तकनीकी मानव संसाधन इस उद्योग की सबसे बड़ी ताकत हैं।

मार्च 2024 में शुरू हुई इस परियोजना में परीक्षण और गुणवत्ता सत्यापन के चरण पूरे होने के बाद अब व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। कंपनी का मानना है कि यह परियोजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







