अमूल की मानव संसाधन प्रमुख डॉ. प्रीति शुक्ला ने गुजरात के पांच दिवसीय अध्ययन दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के दल को अमूल डेयरी की कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुए दी।
आनंद (गुजरात), 22 जुलाई। देश की अग्रणी डेयरी सहकारी संस्था अमूल ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से डेयरी क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाते हुए पशुपालन, दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान और आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक तकनीकों से जोड़ दिया है। अमूल का यह मॉडल ‘गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक’ की अवधारणा पर आधारित है, जिससे किसानों को पारदर्शी, तेज और वैज्ञानिक सेवाएं पत्रकारों के दल को अमूल डेयरी की कार्यप्रणाली से अव उपलब्ध हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि अमूल ने पशुओं के जन्म, पहचान, स्वास्थ्य, टीकाकरण और प्रजनन से जुड़ी पूरी जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया है। किसान अब मोबाइल के माध्यम से पशु चिकित्सा सेवाओं और कृत्रिम गर्भाधान की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं, जिससे सेवाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता बढ़ी है।

अमूल ने पशुओं की निगरानी के लिए स्मार्ट नेक बेल्ट विकसित की है, जो पशु की गतिविधियों, भोजन, आराम और मद चक्र की जानकारी देती है। इससे बीमारी के शुरुआती संकेत मिलने और कृत्रिम गर्भाधान के लिए सही समय का पता लगाने में सहायता मिलती है। यह सुविधा किसानों को मात्र लगभग तीन रुपये प्रति पशु प्रतिदिन की दर पर उपलब्ध कराई जा रही है।

डेयरी क्षेत्र में आधुनिक प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देते हुए अमूल सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, भ्रूण स्थानांतरण (एम्ब्रियो ट्रांसफर) और आईवीएफ तकनीक का भी उपयोग कर रहा है, जिससे अधिक उत्पादक नस्लों का पहचान संख्या के माध्यम से पशुओं से संबंधित जानकारी, स्वास्थ्य सलाह और अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल पशु बाजार तथा दूध सहकारी समितियों में दूध संग्रहण से लेकर भुगतान तक की पूरी विकास संभव हो रहा है।

पशु स्वास्थ्य सेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाने के लिए ग्राम संसाधन व्यक्ति की व्यवस्था की गई है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही स्वच्छ दूध परीक्षण, थनैला रोग की पहचान, जीपीएस आधारित टीकाकरण निगरानी और गर्भ जांच जैसी वैज्ञानिक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

किसानों की सहायता के लिए अमूल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित डिजिटल सहायक ‘सरलाबेन’ विकसित किया है। किसान अपनी पहचान संख्या के माध्यम से पशुओं से संबंधित जानकारी, स्वास्थ्य सलाह और अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल पशु बाजार तथा दूध सहकारी समितियों में दूध संग्रहण से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाया गया है।
दूध की आपूर्ति श्रृंखला में जीपीएस आधारित दूध टैंकर निगरानी, मार्ग अनुकूलन और स्वचालित नमूना प्रणाली लागू की गई है, जिससे संग्रहण केंद्र से डेयरी संयंत्र तक दूध की गुणवत्ता और परिवहन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। डेयरी संयंत्रों में कागजरहित प्रेषण, डिजिटल फाइल प्रित युवा किसानों के घर जाकर दूध दुहबंधन, ऑनलाइन अनुमोदन और स्वचालित भंडारण जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।
ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अमूल ने ‘मिल्क-ओ-बाइक’ पहल शुरू की है। इसके तहत पोर्टेबल दूध दुहने वाली मशीन के साथ प्रशिक्षित युवा किसानों के घर जाकर दूध दुहने की सेवा प्रदान करते हैं, जिससे किसानों का श्रम कम होने के साथ युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
डॉ. प्रीति शुक्ला ने कहा कि अमूल का लक्ष्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से किसान, पशु, दुग्ध सहकारी समिति और उपभोक्ता को एक ही मंच पर जोड़ना है। इससे डेयरी क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।








