– डॉ गौरव कुमार सिंह, 2013 बैच के आईएएस अधिकारी है। मूलरूप से उत्तप्रदेश के हरदोई जिले से है
-शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रैफिक, महिला सशक्तिकरण और शहर के विकास पर खुलकर रखी बात
–हमारा प्रयास है कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद और अधिक मजबूत हो

रायपुर।हम मानते हैं कि किसी भी प्रशासनिक पहल की सफलता तभी है, जब उससे लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव आए और उनके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान दिखाई दे। उपरोक्त बातें छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की जिम्मेदारी संभाल रहे कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह (आईएएस)ने कही।
व्यवसाय खबर डॉट कॉम से “माटी के लाल” सेगमेंट में एक खास चर्चा के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रैफिक, महिला सशक्तिकरण और शहर के विकास, सरकार की संचालित योजना सहित कई पहलुओं पर खुलकर चर्चा हुई, जिसके प्रस्तुत है प्रमुख अंश..
प्रश्न: आपको सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026 में देश के टॉप कलेक्टर्स का सम्मान मिला है। इसे आप किस रूप में देखते हैं?
-(कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह): देखिए कोई भी सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं होता। यह पूरे जिले की टीम और माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व का सम्मान है। जिले में कलेक्टर की अपनी भूमिका होती है, लेकिन मुख्यमंत्री के दिशानिर्देश में सभी विभागों की टीम मिलकर काम करती है। ऐसे में जिले को मिलने वाली हर उपलब्धि का श्रेय पूरी टीम और मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन को जाता है।
प्रश्न: आपने 50 से ज्यादा प्रोजेक्ट शुरू किए हैं — इस विचार की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर :जिला प्रशासन की टीम ने महसूस किया कि हर क्षेत्र की समस्याएं अलग-अलग हैं और उनका समाधान भी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। इसी सोच के साथ हमने हर प्रमुख विषय पर केंद्रित प्रोजेक्ट तैयार करने की पहल की।

इन प्रोजेक्ट्स में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सुविधा और जनसेवा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। हमारा उद्देश्य केवल नई योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिले और प्रशासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बने।
प्रश्न : सभी प्रोजेक्ट ऑनलाइन मोड पर लाने की क्या जरूरत महसूस हुई?
उत्तर:आज के समय में तकनीक प्रशासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने का सबसे मजबूत माध्यम है। ऑनलाइन सिस्टम से हर प्रोजेक्ट की प्रगति की निगरानी आसान होगी और वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध रहेगी। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही नागरिक अपनी शिकायतें, सुझाव और फीडबैक सीधे दर्ज करा सकेंगे। हमारा प्रयास है कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद और अधिक मजबूत हो।
प्रश्न : इन प्रोजेक्ट्स में सबसे अधिक असर किन योजनाओं का दिखा है?
उत्तर :कई प्रोजेक्ट्स ने अपने स्तर पर अच्छे परिणाम दिए हैं। ‘धड़कन प्रोजेक्ट के माध्यम से 18 वर्ष तक के बच्चों की हृदय संबंधी जांच की जा रही है और कई बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया है।

इसी तरह ‘घंटी प्रोजेक्ट ने स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति एक नई जागरूकता पैदा की है। घंटी बजते ही सभी बच्चे एक साथ पानी पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिली है।
यू आकार प्रोजेक्ट के माध्यम से कक्षा में बैठने की ऐसी व्यवस्था की गई है, जिससे हर बच्चे को बराबर महत्व मिले और उनमें आत्मविश्वास बढ़े। हमारा प्रयास है कि हर पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक बने।
प्रश्न 4: हर प्रोजेक्ट का नाम काफी अनोखा होता है — इनके चयन की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर : किसी भी प्रोजेक्ट का नाम केवल पहचान नहीं होता, बल्कि उसकी भावना और उद्देश्य को भी दर्शाता है। इसके लिए हमने लगभग 25 से 30 अधिकारियों की टीम बनाई है, जो अलग-अलग विषयों पर सुझाव देती है।

सभी सुझावों पर चर्चा के बाद ऐसा नाम चुना जाता है, जो लोगों को आसानी से समझ आए और उससे भावनात्मक जुड़ाव भी हो। यही कारण है कि ‘दधिचि, ‘हरिहर पाठशाला और ‘विजयी भव ‘गोल्डन ऑवर, ‘पढ़े रायपुर, बढ़े रायपुर जैसे नाम लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना पाए हैं।
प्रश्न 6: इन योजनाओं का सीधा लाभ किन वर्गों को मिल रहा है?
उत्तर :इन सभी प्रोजेक्ट्स का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच रहा है। बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं, महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं आम नागरिकों को भी प्रशासनिक सेवाएं अधिक सरल और सुलभ तरीके से उपलब्ध हो रही हैं।
प्रश्न: राजधानी रायपुर की सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?


उत्तर: रायपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है। जैसे-जैसे शहर मेट्रो की ओर बढ़ता है, नई चुनौतियां भी सामने आती हैं। ट्रैफिक का बढ़ता दबाव प्रमुख समस्या है। इसके समाधान के लिए नई सड़कें, फ्लाईओवर और ट्रैफिक इंजीनियरिंग के जरिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। आने वाले समय की जरूरतों के अनुसार भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
प्रश्न: शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या प्रमुख पहल हुई हैं?

उत्तर: बोर्ड के परिणामों में सुधार के लिए ‘मिशन उत्कर्ष के माध्यम से विद्यार्थियों की नियमित परीक्षा, शिक्षकों का प्रशिक्षण और सतत मूल्यांकन शुरू किया। इसका सकारात्मक परिणाम मिला और बोर्ड परीक्षा परिणामों में लगभग 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। अब ‘उत्कर्ष 2.0 पर काम किया जा रहा है।

प्रश्न: बदलती जीवन शैली में स्वास्थ्य के लिए क्या कार्य हो रहे हैं?

स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘लाइफस्टाइल क्लिनिक शुरू किया गया है, जहां मोटापा, मानसिक तनाव जैसी जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का उपचार किया जाता है। ‘प्रोजेक्ट धड़कन के तहत अब तक करीब 1.30 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है और जरूरतमंद बच्चों का इलाज एवं ऑपरेशन कराया गया है। डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए भी कई परियोजना भी संचालित की जा रही है।

प्रश्न: अवैध खनन और अतिक्रमण के मामलेे बढ़ रहे, इसमें क्या कार्रवाई की जा रही है?

उत्तर: जैसे-जैसे विकास बढ़ता है, चुनौतियां भी बढ़ती हैं। खनिज विभाग और प्रशासन ने अवैध खनन एवं अतिक्रमण के खिलाफ रिकॉर्ड स्तर पर कार्रवाई की है। ‘टीम प्रहरी लगातार निगरानी कर रही है। जनता से भी अपील है कि किसी भी अवैध गतिविधि से दूर रहें।
प्रश्न: एक आईएएस अधिकारी के रूप में आपकी प्राथमिकता क्या है?


उत्तर: यह नौकरी नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है। सबसे अधिक संतोष तब मिलता है, जब कोई व्यक्ति हमारे कार्यालय से मुस्कुराते हुए लौटता है। हमारी कोशिश रहती है कि लोगों की समस्याओं का समाधान हो और उन्हें राहत मिले।
प्रश्न: पीएम सूर्य योजना जैसी कई सरकारी योजनाओं के लाभ मिलने में तकनीकी खामी आ रही?

उत्तर: बड़ी व्यवस्थाओं में छोटी समस्याएं आना स्वाभाविक है। इनके समाधान के लिए हर शुक्रवार संबंधित विभागों की सीईओ के माध्यम से संयुक्त बैठक आयोजित की जाती है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में पीएम सूर्यघर योजना के तहत स्थापित कुल सिस्टमों में लगभग 23 प्रतिशत अकेले रायपुर जिले में स्थापित हुए हैं।
प्रश्न: महिला स्व-सहायता समूहों में क्या बदलाव देखने को मिल रहे हैं?
उत्तर: पहले जिन केंद्रों का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना था, वे अब प्रशिक्षण केंद्र बन चुके हैं। महिलाएं बकरी पालन, ड्रोन संचालन, पिंक दीदी और बिजनेस दीदी जैसी गतिविधियों से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। कई महिलाएं अब लखपति उद्यमी बन चुकी हैं।
प्रश्न: योजनाओं में निजी संस्थाओं की भागीदारी को लेकर उठने वाले सवालों पर आपका क्या कहना है?
उत्तर: जहां विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, वहां विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद ली जाती है। उदाहरण के तौर पर मशरूम उत्पादन में शुरुआत विशेषज्ञों ने कराई, लेकिन आज वही महिलाएं स्वयं सफल उद्यमी बन चुकी हैं। हमारा उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।


प्रश्न: आपकी पसंदीदा पुस्तक और प्रेरणा स्रोत कौन हैं?
उत्तर: मुझे पढ़ने का बहुत शौक है। मेरी पसंदीदा पुस्तकों में ‘कितने पाकिस्तान शामिल है। मेरे सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत मेरे माता-पिता हैं।
प्रश्न: युवाओं के लिए आपका संदेश क्या है?
उत्तर: ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते की भावना के साथ काम करें। स्वामी विवेकानंद का संदेश— ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको ‘—आज भी उतना ही प्रासंगिक है। साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और स्वच्छता में हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए।

प्रश्न: आने वाले समय में क्या नए नवाचार देखने को मिलेंगे?

उत्तर: नवाचार केवल नई योजनाएं नहीं होते, बल्कि कार्यप्रणाली में छोटे-छोटे सुधार भी नवाचार हैं। लोगों को अधिकतम लाभ मिले, इसी उद्देश्य से समय-समय पर जिले में आवश्यक बदलाव किए जाते रहेंगे।
प्रश्न: शहर में जलभराव की समस्या बनी हुई, समाधान के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
उत्तर: जहां-जहां जलभराव की समस्या आती है, वहां रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। साथ ही नागरिकों से अपील है कि नालियों में कचरा न डालें और अतिक्रमण न करें। प्रशासन और जनता मिलकर काम करेंगे तभी स्थायी समाधान संभव होगा।
प्रमुख बिदुं
-महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार देने के लिए गारमेंट फैक्ट्री की स्थापना कराई, पालनार को कैशलेस ट्रांजैक्शन विलेज बनाया, प्रदेश का पहला बीपीओ कॉल सेंटर दंतेवाड़ा में शुरू कराया और महिलाओं को ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। इन प्रयासों से नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।

-बेहतर कार्यों के लिए उन्हें 4 नेशनल अवार्ड और प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवार्ड भी प्राप्त हुए। उनके कार्यकाल में ‘लंच विद कलेक्टर जैसी पहल और जनसंपर्क के नवाचारों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया। विदाई के समय जिलेवासियों का बड़ा हुजूम उन्हें विदा करने पहुंचा था।

–दंतेवाड़ा के बाद उन्होंने धमतरी, दुर्ग और रायपुर में जिला पंचायत सीईओ के रूप में भी कार्य किया। कोरोना काल में रायपुर में उनकी सक्रिय भूमिका की व्यापक सराहना हुई। वे मुंगेली जिले के कलेक्टर भी रहे, जहां उन्होंने 2 महीने में 100 गांवों में चौपाल लगाकर जनसमस्याओं के समाधान का रिकॉर्ड बनाया।

–इसके बाद वे बालोद और सूरजपुर जिले के कलेक्टर भी रहे। उनकी कार्यशैली को प्रभावी और जनकेंद्रित माना जाता है।
बाक्स में
हमेशा में अपने कार्यो को लेकर सुखिर्यो में रहे रहे


रायगढ़ में सहायक कलेक्टर, सरायपाली में एसडीएम, दंतेवाड़ा जिला पंचायत के सीईओ और रायपुर जिला पंचायत सीईओ, सूरजपुर के कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। दंतेवाड़ा में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल नवाचार और पर्यटन के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय पहल कीं, जिनसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। कई अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके है, राज्य में अपने निर्णय और कार्यो को लेकर हमेशा सुखिर्यो में रहे है।
जर्मनी की फेलोशिप भी मिली थी, हालांकि वे जर्मनी नहीं गए
डॉ. गौरव कुमार सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई सुल्तानपुर से, मास्टर्स दिल्ली आईआईटी से और पीएचडी दिल्ली में की। उन्हें जर्मनी की फेलोशिप भी मिली थी, हालांकि वे जर्मनी नहीं गए। उन्होंने हिंदी माध्यम से यूपीएससी की तैयारी कर वर्ष 2012 में आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण की।










