कुलपति कार्यालय से नहीं हुई वार्ता, लेखा नियंत्रक से हुई चर्चा; लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण की मांग
रायपुर, 31 जुलाई 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक संघ का क्रमिक धरना एवं सत्याग्रह शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। संघ ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन और संघ के प्रतिनिधियों के बीच पूर्व में हुई सहमति के बावजूद अब तक लंबित मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे सेवानिवृत्त प्राध्यापकों में नाराजगी बढ़ रही है।
संघ के अनुसार, आंदोलन के दौरान कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल से वार्ता नहीं हो सकी। संघ के पदाधिकारी दिनभर आगे की चर्चा और समाधान की उम्मीद में प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण आंदोलन चल रहा है, ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि संवाद स्थापित कर समाधान निकाला जाए।

संघ ने यह भी कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुलपति 3 से 6 अगस्त तक मुख्यालय से बाहर रहेंगे। संघ ने सवाल उठाया कि जब पेंशन और महंगाई राहत जैसे गंभीर विषयों को लेकर आंदोलन जारी है, तब ऐसी स्थिति में प्रशासनिक स्तर पर शीघ्र निर्णय की आवश्यकता है।

इसी बीच लेखा नियंत्रक मनीषा नाग के आमंत्रण पर संघ के पदाधिकारियों ने उनसे सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा की। संघ अध्यक्ष डॉ. एन.के. चौबे ने कहा कि यदि पेंशन प्रकरण करीब दो वर्षों से लंबित हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जीवन के अंतिम पड़ाव तक अपनी पेंशन के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए।
डॉ. चौबे ने 58 प्रतिशत महंगाई राहत के मुद्दे पर कहा कि विश्वविद्यालय को वर्ष 1995 से लागू सामान्य भविष्य निधि (GPF) व्यवस्था की तरह पृथक पेंशन फंड का संचालन करना चाहिए था, ताकि पेंशन भुगतान व्यवस्था मजबूत रहती। उन्होंने कहा कि समय पर ऐसी व्यवस्था लागू होती तो वर्तमान संकट की स्थिति नहीं बनती।
संघ ने मांग की है कि सभी लंबित पेंशन प्रकरणों को शीघ्र पूरा कर ऑडिट के लिए भेजा जाए, राज्य शासन के अनुरूप 58 प्रतिशत महंगाई राहत का आदेश तत्काल जारी किया जाए तथा सातवें वेतनमान के एरियर और अन्य लंबित भुगतान की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
सेवानिवृत्त शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस और समयबद्ध निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।








