जिन्होंने बनाया विश्वविद्यालय का भविष्य, आज वही अपने अधिकारों के लिए सड़क पर
रायपुर, 28 जुलाई 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं वैज्ञानिकों ने लंबित पेंशन, महंगाई राहत (DR) एवं अन्य वैधानिक देयों के भुगतान को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। उपेक्षा का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। वर्षों तक विश्वविद्यालय की सेवा करने वाले वरिष्ठ प्रोफेसर और वैज्ञानिक आज अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि 86 वर्ष की आयु के सेवानिवृत्त प्रोफेसर को भी अपने हक की मांग को लेकर धरने पर बैठना पड़ रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षितडॉ. एन.के. चौबे अध्यक्ष सेवानिवृत्त शिक्षक संघ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी आरोप लगाया है कि लंबे समय से पेंशन प्रकरण, महंगाई राहत और अन्य देयों का निराकरण नहीं किया गया है। संघ का कहना है कि कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका, जिसके कारण वरिष्ठ प्रोफेसर को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
संघ ने कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जिन शिक्षकों और वैज्ञानिकों ने अपना जीवन विश्वविद्यालय और कृषि शिक्षा के विकास में समर्पित किया, उन्हें आज अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन की संवेदनहीन कार्यप्रणाली को दर्शाती है।

शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की अपील की सेवानिवृत्त शिक्षक संघ ने कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल से तत्काल हस्तक्षेप कर सभी लंबित मामलों का निपटारा करने की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, मुख्य सचिव एवं कृषि सचिव से हस्तक्षेप कर पेंशन, DR और अन्य बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की अपील की गई है।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सात सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसे और व्यापक किया जाएगा।







