सेवानिवृत्त पेंशनर्स संघ का क्रमिक धरना मंगलवार को नौवें दिन भी जारी
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) रायपुर के सेवानिवृत्त पेंशनर्स संघ का क्रमिक धरना मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। धरने को भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ का समर्थन मिला। महासंघ के पदाधिकारियों ने प्रभारी कुलपति, कुलसचिव और लेखानियंत्रक से लंबित पेंशन प्रकरणों, महंगाई राहत (डीआर) और एरियर भुगतान को लेकर विस्तृत चर्चा की।
भुगतान में धन की कमी को प्रमुख कारण बतायामहासंघ ने मांग की कि जिन सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों की पेंशन अब तक स्वीकृत नहीं हुई है, उनकी नामवार सूची तथा लंबित रहने के कारण लिखित रूप में उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वास्तविक स्थिति राज्य शासन के समक्ष रखकर शीघ्र समाधान कराया जा सके। बैठक में लेखानियंत्रक ने डीआर और एरियर भुगतान में धन की कमी को प्रमुख कारण बताया।

प्रभावी आदेशों में परिवर्तन करना न केवल अनुचित हैइस पर महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि समस्या धन की नहीं, बल्कि प्रशासनिक और वित्तीय इच्छाशक्ति की है। उनका कहना था कि राज्य शासन द्वारा जारी महंगाई राहत के आदेशों को विश्वविद्यालय को बिना किसी बदलाव के लागू करना चाहिए। शासन के प्रभावी आदेशों में परिवर्तन करना न केवल अनुचित है, बल्कि इसकी वैधानिकता भी स्पष्ट होनी चाहिए।


वीडियो क्रेडिट लाइन:
वीडियो : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) रायपुर के सेवानिवृत्त पेंशनर्स संघ के माध्यम से प्राप्त।
वैधानिक पेंशन प्रकरण लंबित रखे जा रहे हैंमहासंघ ने यह भी कहा कि वित्तीय अनुशासन और विश्वविद्यालय निधियों के विनियमन की जिम्मेदारी लेखानियंत्रक की है, जबकि प्रशासनिक आदेश जारी करना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना कुलसचिव और विश्वविद्यालय प्रशासन का दायित्व है। यदि वैधानिक पेंशन प्रकरण लंबित रखे जा रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही भी प्रशासन की होगी।
वीडियो क्रेडिट लाइन:वीडियो : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) रायपुर के सेवानिवृत्त पेंशनर्स संघ के माध्यम से प्राप्त।
बैठक के दौरान चेतावनी दी गई कि यदि शुक्रवार तक लंबित पेंशन प्रकरणों, महंगाई राहत और एरियर भुगतान का ठोस समाधान नहीं हुआ, तो भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ आंदोलन को खुला समर्थन देगा। इसके बाद वित्त विभाग, राजभवन, कृषि विभाग और राज्य शासन के समक्ष मामला उठाकर आंदोलन को और व्यापक तथा निर्णायक बनाया जाएगा।
सेवानिवृत्त पेंशनर्स संघ ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों के वैधानिक अधिकार बहाल होने तक क्रमिक धरना और संघर्ष लगातार जारी रहेगा।








