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एम्स की वेबसाइट पर यूनानी ओपीडी चालू, मरीजों को मौके पर डॉक्टर का इंतजार

यूनानी इलाज की उम्मीद लेकर पहुंच रहे मरीजों को दूसरे आयुष विभागों में जाने की सलाह, करीब तीन साल से व्यवस्था प्रभावित होने का दावा

रायपुर। एम्स रायपुर के आयुष विभाग में यूनानी चिकित्सा की सुविधा को लेकर मरीजों की परेशानी सामने आ रही है। यूनानी पद्धति से उपचार कराने की उम्मीद में एम्स पहुंचने वाले मरीजों को नियमित यूनानी चिकित्सक नहीं मिलने पर आयुर्वेद, होम्योपैथी या योग विभाग की ओपीडी में जाने की सलाह दिए जाने की बात सामने आई है। इससे खासकर उन मरीजों की मुश्किल बढ़ रही है, जो किसी विशेष बीमारी के लिए यूनानी चिकित्सा पद्धति से उपचार कराने एम्स पहुंचते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि एम्स रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट पर यूनानी विभाग का पेज अब भी उपलब्ध है। इसमें यूनानी ओपीडी के समय के साथ डॉ. अदनान मस्तान को मेडिकल ऑफिसर (AYUSH)-Unani के रूप में प्रदर्शित किया गया। वेबसाइट पर यूनानी चिकित्सा के तहत विभिन्न बीमारियों के उपचार और कई तरह की उपचार पद्धतियों की जानकारी भी दी गई है।

सिर्फ दवा नहीं, कई उपचारों की सुविधा अपने दस्तावेजों के मुताबिक यूनानी विभाग में केवल मरीजों की जांच और दवा देने तक सीमित व्यवस्था नहीं थी। विभाग में कपिंग थेरेपी (हिजामा), लीच थेरेपी, गर्म सिकाई, मसाज और स्टीम थेरेपी जैसी यूनानी उपचार पद्धतियां भी संचालित की जाती थीं। एम्स की एक वार्षिक रिपोर्ट में यूनानी विभाग द्वारा ओपीडी और आईपीडी मरीजों के उपचार तथा इन उपचारों के संचालन का उल्लेख है। पुरानी वार्षिक रिपोर्ट में यूनानी ओपीडी में 1,786 मरीजों के उपचार और 650 चिकित्सकीय प्रक्रियाएं किए जाने का भी रिकॉर्ड दर्ज है।

यानी जिस विभाग में कभी मरीजों को परामर्श के साथ विशेष यूनानी उपचार उपलब्ध कराए जाते थे, वहां वर्तमान व्यवस्था को लेकर मरीजों के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है।

दूर से आए मरीजों की बढ़ रही परेशानीयूनानी चिकित्सा के भरोसे एम्स पहुंचने वाले मरीजों की समस्या सिर्फ डॉक्टर से परामर्श नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। कई मरीज यूनानी पद्धति से ही आगे का उपचार, दवा और आवश्यक थेरेपी लेने की उम्मीद में आते हैं। ऐसे में उन्हें किसी दूसरे आयुष विभाग में भेजे जाने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है।

दूर-दराज से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। यदि यूनानी ओपीडी में नियमित चिकित्सक उपलब्ध नहीं है तो मरीजों को इसकी स्पष्ट जानकारी पहले से मिलनी चाहिए, ताकि वे अनावश्यक रूप से एम्स तक आने और फिर दूसरे विभाग में भटकने से बच सकें।

रिकॉर्ड में सेवा, जमीन पर सवाल एम्स की वेबसाइट पर यूनानी ओपीडी के संचालन का विवरण और चिकित्सक का नाम दर्ज है, जबकि मरीजों की मौजूदा शिकायतें इसके विपरीत स्थिति की ओर इशारा करती हैं। यही सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यूनानी ओपीडी वास्तव में नियमित रूप से संचालित हो रही है? यदि नहीं, तो वेबसाइट पर इसकी जानकारी अपडेट क्यों नहीं की गई?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में डॉ. अदनान मस्तान के यूपीएससी के माध्यम से ए एंड यू तिब्बिया कॉलेज, नई दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर (यूनानी) के पद पर चयन के बाद एम्स रायपुर से उनके इस्तीफे और कार्यमुक्त होने का मामला सामने आया था। इसके बाद दोबारा ज्वाइनिंग से जुड़ा प्रकरण न्यायालय तक पहुंचने की बात कही जा रही है।

अब मरीजों का सवाल सीधा है—यूनानी चिकित्सा के लिए एम्स आने वाले मरीजों को इलाज मिलेगा तो कब और किस व्यवस्था के तहत?

एम्स प्रशासन को यूनानी ओपीडी की वर्तमान स्थिति, चिकित्सक की उपलब्धता और मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद भटकना न पड़े।

एम्स रायपुर का पक्ष

एम्स रायपुर के पीआरओ डॉ. मृत्युंजय राठौर ने बताया कि एम्स रायपुर के आयुष विभाग द्वारा मरीजों को विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। वर्तमान में यूनानी ओपीडी की सेवाएं अस्थायी रूप से संचालित नहीं हो रही हैं। यूनानी ओपीडी को पुनः प्रारंभ करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया एवं औपचारिकताएं प्रगति पर हैं।

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