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रामलीला के मंच पर भाईचारे की मिसाल, घाटकोपर में रामचरितमानस की भावना से साकार हो रही गंगा-जमुनी तहज़ीब

मुंबई के घाटकोपर में 63 वर्षों से चली आ रही रामलीला में मुस्लिम कलाकारों की भागीदारी दे रही है प्रेम, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश

रामलीला को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के कार्यकाल में आदर्श रामलीला पुरस्कार भी मिला

समिति के ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष अशोक रामापति दुबे बोले सभी सदस्यों का सहयोग, आस्था के साथ इंसानियत को भी सर्वोच्च स्थान

#अतिथिदेवोंभव.. डैशिंग दयावान विधायक राम क़दम जी का स्वागत..

मुंबईव्यवसाय खबर पंकज दुबे। भगवान श्रीराम की कथा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मर्यादा, करुणा, सेवा और लोककल्याण का ऐसा संदेश है, जो समाज को जोड़ने की प्रेरणा देता है। मुंबई के घाटकोपर में 63 वर्ष से आयोजित हो रही श्री रामलीला महोत्सव समिति की रामलीला इसी भावना को जीवंत करती दिखाई देती है।

समिति के ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष अशोक रामापति दुबे

समिति के ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष अशोक रामापति दुबे और अन्य पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजन को हर वर्ष भव्य एवं आकर्षक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर व्यवस्थाओं के माध्यम से शानदार प्रस्तुति देने की जिम्मेदारी निर्वहन कर रहे है। इसी संदर्भ में घाटकोपर की रामलीला सामाजिक सद्भाव का एक उदाहरण बनकर सामने आती है।

अध्यक्ष अशोक दुबे

इंसानियत को भी सर्वोच्च स्थान दिया गया
अध्यक्ष अशोक दुबे ने एक खास मुलाकात में बताया कि आयोजन का उद्देश्य रामलीला की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ना है। यहां राम के जयकारों के बीच हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर आयोजन करते हैं। कोई मंच पर रामकथा के पात्रों को जीवंत करता है, तो कोई श्रद्धालुओं की सेवा में जुटा रहता है। यह दृश्य भारतीय संस्कृति की उस साझा विरासत की याद दिलाता है, जिसमें आस्था के साथ इंसानियत को भी सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

मंच पर रफीक शाह, भाव में रामभक्ति
घाटकोपर की रामलीला की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में मुस्लिम कलाकार रफीक शाह की भागीदारी है। वे वर्षों से इस मंच से जुड़े हैं और विभिन्न महिला तथा अन्य पात्रों की भूमिकाएं निभाते रहे हैं। समिति के लोग उन्हें स्नेहपूर्वक राकेश शाह के नाम से भी संबोधित करते हैं।
रफीक शाह के लिए रामलीला केवल अभिनय नहीं, बल्कि सेवा और आस्था से जुड़ा अनुभव है। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम की सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। यहां यह दृश्य विशेष अर्थ रखता है कि रामकथा के मंचन में कलाकार की धार्मिक पहचान से अधिक उसके समर्पण और अभिनय को महत्व दिया जाता है। कोई व्यवस्था संभालता है, कोई कलाकारों की सहायता करता है, तो कोई श्रद्धालुओं के लिए चाय-पानी की सेवा करता है।

अध्यक्ष कार्यकारिणी सुनिल दामोदर दुबे

63 वर्षों की परंपरा, बदलते समय के साथ आधुनिक रूप
अध्यक्ष कार्यकारिणी सुनिल दामोदर दुबे ने बताया कि घाटकोपर की रामलीला की शुरुआत लगभग छह दशक पहले सीमित संसाधनों के साथ हुई थी। शुरुआती दौर में छोटा मंच होता था और दर्शक जमीन पर बोरियां तथा चटाइयां बिछाकर रामलीला देखा करते थे। समय के साथ आयोजन का विस्तार हुआ घाटकोपर की यह रामलीला लगभग 63 वर्षों से आयोजित की जा रही है।


#अतिथिदेवोंभव.. डैशिंग दयावान विधायक राम क़दम जी का स्वागत..

शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों और छोटे मंच से शुरू हुई यह परंपरा आज विशाल पंडाल, एलईडी स्क्रीन, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, प्रोजेक्शन मैपिंग और विशेष दृश्य प्रभावों तक पहुंच चुकी है। राम की बारात, विवाह प्रसंग, लंका दहन और पुष्पक विमान जैसे दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बनते हैं।

पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत है
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि वे वर्ष 2012 से मिल-जुलकर इस आयोजन को आगे बढ़ाने में लगे हैं। समिति के पदाधिकारियों और पुराने सदस्यों के लिए यह आयोजन केवल वार्षिक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत है। इसमें बुजुर्गों की स्मृतियां, युवाओं की भागीदारी और नई तकनीक का मेल दिखाई देता है।


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