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छत्तीसगढ़ी माटी की महक, पंडवानी की गाथा और बॉलीवुड गीतों की गूंज के साथ राज्योत्सव की यादगार सांस्कृतिक संध्या

अंतिम दिन बॉलीवुड पार्श्व गायक अभिजीत के सदाबहार नगमों के साथ सुनील सोनी के गीतों ने बांधा समां

उषा बारले की पंडवानी में जीवंत हुई लोकगाथाओं की परंपरा, समृद्ध लोकसंस्कृति के विविध रंगों से सजा राज्योत्सव

शिल्प ग्राम मंच पर पंथी, कथक, जसगीत, सूफी संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा

राज्योत्सव की अंतिम शाम में गूंजे अभिजीत के सदाबहार नगमे, छत्तीसगढ़ी गीतों ने बांधा समां

सुनील सोनी और उषा बारले की प्रस्तुतियों ने बिखेरे लोकसंस्कृति के रंग, शिल्प ग्राम में कथक, पंथी और सूफी संगीत की दिखी छटा

रायपुर, 03 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की अंतिम सांस्कृतिक संध्या संगीत, लोककला और नृत्य की विविध प्रस्तुतियों के नाम रही। नवा रायपुर के राज्योत्सव मेला मैदान में बॉलीवुड के प्रसिद्ध पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और लोक कलाकार उषा बारले ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं शिल्प ग्राम मंच पर लोकनृत्य, कथक, सूफी संगीत और नाटक सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत की झलक दिखाई।

अभिजीत के गीतों पर झूमे संगीतप्रेमी

बॉलीवुड गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने ‘चांद तारे’, ‘बादशाह ओ बादशाह’, ‘बहुत खूबसूरत हो’ और ‘वादा रहा सनम’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर शाम को यादगार बना दिया। उनके सदाबहार नगमों ने दर्शकों को बॉलीवुड संगीत के सुनहरे दौर की याद दिलाई।

सुनील सोनी ने छत्तीसगढ़ी गीतों से बांधा समां

छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी ने ‘छैंया भुइंया ला छोड़ तैं’, ‘झन भूलौ मां-बाप ला’, ‘मीठ-मीठ लागे मया के बानी’ और फिल्म ‘हांडा’ के लोकप्रिय गीत ‘ए गोरी ओ गोरी’ की प्रस्तुति दी। उनके गीतों में छत्तीसगढ़ की माटी, पारिवारिक रिश्तों, मया और आत्मीयता की भावनाएं झलकीं।

उषा बारले की पंडवानी ने जीवंत की लोकगाथा

प्रसिद्ध लोक कलाकार उषा बारले ने पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकगाथा और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर साकार किया।

शिल्प ग्राम में लोककला और शास्त्रीय संगीत का संगम

शिल्प ग्राम मंच पर भी 10 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। आस्था भट्ट ने भजन गायन किया, जबकि आरती बारले और दिनेश कुमार जांगड़े के दलों ने पंथी नृत्य प्रस्तुत किया। राकेश सेन के नेतृत्व में लोकमंच और पूर्णिमा साहू ने जसगीत-जगराता की प्रस्तुति दी। अभिषेक सोनकर के दल ने आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य से जनजातीय संस्कृति के रंग बिखेरे।

इसके अलावा दीपाली पाण्डेय के दल ने कथक समूह नृत्य और अनुष्णा रॉय चौधरी ने कथक की प्रस्तुति दी। वृधुमन वचस्पति भारती ने सूफी संगीत से समां बांधा, वहीं आनंदकुमार पाण्डेय के दल ने नाटक का मंचन किया। इन प्रस्तुतियों के साथ राज्योत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं और भारतीय कला-संस्कृति की विविधता के यादगार उत्सव के रूप में संपन्न हुई।

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