बागवानी, साफ-सफाई और सामूहिक भोजन व्यवस्था के साथ उन्हें अक्षर ज्ञान, गणित और अंग्रेजी की शिक्षा दी जा रही
रायपुर, 2 जून 2026। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में बदलाव की एक नई तस्वीर सामने आई है। जिला प्रशासन के पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवा—जिनमें 42 महिलाएं और 71 पुरुष शामिल हैं—अब मुख्यधारा से जुड़कर नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। केंद्र परिसर में पहली बार युवाओं द्वारा लगाए गए ‘भारत माता की जय’ के नारों ने क्षेत्र में शांति और विश्वास के नए माहौल का संदेश दिया।
अनुशासित जीवन और शिक्षा से बदल रही पहचान
पुनर्वास केंद्र में युवाओं की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासित और रचनात्मक है। बागवानी, साफ-सफाई और सामूहिक भोजन व्यवस्था के साथ उन्हें अक्षर ज्ञान, गणित और अंग्रेजी की शिक्षा दी जा रही है। साथ ही आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज भी प्राथमिकता से बनाए जा रहे हैं। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

हथियार छोड़े, खेल का मैदान अपनाया
मनोरंजन और खेल गतिविधियों में युवाओं की सबसे अधिक रुचि वॉलीबॉल में देखने को मिली। प्रशासन द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में युवक-युवतियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कभी हथियार उठाने वाले हाथ अब वॉलीबॉल कोर्ट में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा खेल के माध्यम से नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
5G स्मार्टफोन से डिजिटल दुनिया से जुड़ाव
पुनर्वास केंद्र में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए 5G स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वे देश-दुनिया की खबरों और नई जानकारियों से जुड़ पा रहे हैं। शाम के समय संगीत कक्ष में सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक विकास हो रहा है।
सुकमा का मॉडल बना पुनर्वास की नई मिसाल
सुकमा जिला पुनर्वास केंद्र का यह मॉडल दिखाता है कि सही मार्गदर्शन, शिक्षा, खेल और तकनीकी सुविधाओं के माध्यम से भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा में सफलतापूर्वक वापस लाया जा सकता है। यह पहल न केवल युवाओं के जीवन में नया सवेरा ला रही है, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की उम्मीद भी मजबूत कर रही है।






