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सुरक्षित भोजन की दिशा में छत्तीसगढ़ की नई पहल, हर तीन महीने में सामने आएंगे खाद्य जांच के नतीजे

दीपक अग्रवाल बोले– एक साल में शुरू होगी नई अत्याधुनिक सरकारी लैब, पूरे साल चलेगी खाद्य सुरक्षा की निगरानी

विशेष साक्षात्कार | दीपक अग्रवाल, नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़

  • दुर्ग में 2500 किलो मिठाई नष्ट कराने की कार्रवाई
  • एनालॉग पनीर के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध
  • खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षण और जागरूकता पर जोर
  • शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बाद ही माना जाएगा शिकायत का निराकरण
  • उपभोक्ता गोपनीय पहचान के साथ कर सकेंगे शिकायत

रायपुर। सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ हर नागरिक का अधिकार है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ का खाद्य एवं औषधि प्रशासन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और मिलावट पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। vyavasaykhabar.comविभाग अब केवल त्योहारों के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे साल खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, नमूना संग्रह और जांच की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दे रहा है।

हाल ही में दुर्ग में लगभग 2500 किलो मिठाई नष्ट कराने की कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा को लेकर विभाग की सक्रियता को सामने रखा है। वहीं, प्रदेश में एनालॉग पनीर के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय भी लिया गया है।

खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट में होने वाली देरी कम करने के लिए निजी प्रयोगशालाओं की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही एक नई अत्याधुनिक सरकारी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की तैयारी है, जिसे एक वर्ष के भीतर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

उपभोक्ताओं तक जांच की जानकारी पहुंचाने के लिए विभाग हर तीन महीने में खाद्य नमूनों की जांच और कार्रवाई के परिणाम सार्वजनिक करने की दिशा में भी कदम उठा रहा है।

खाद्य सुरक्षा, मिलावट पर नियंत्रण, नई प्रयोगशाला, विभागीय संसाधनों, कारोबारियों के प्रशिक्षण और उपभोक्ताओं की शिकायतों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवसाय खबरने खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक श्री दीपक अग्रवाल से विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश—


प्रश्न–उत्तर

व्यवसाय खबर : त्योहारों के इस सीजन में खाद्य सुरक्षा को लेकर विभाग ने विशेष अभियान चलाया है। आप स्वयं भी मैदान में उतरकर कार्रवाई की निगरानी कर रहे हैं। अब तक इस अभियान के क्या परिणाम सामने आए हैं?

दीपक अग्रवाल: आगामी त्योहारों को देखते हुए सीएम हेल्पलाइन सहित विभिन्न माध्यमों से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर काफी शिकायतें मिल रही थीं। इसी के मद्देनजर FSSAI के निर्देशों और विभागीय स्तर पर विशेष कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

हमारे खाद्य सुरक्षा अधिकारी और अभिहित अधिकारी नियमित रूप से कार्रवाई कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान विशेष अभियान चलाने का उद्देश्य कारोबारियों और आम जनता के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि शासन और विभाग की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है।

इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। उपभोक्ता खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर जागरूक हो रहे हैं। खाद्य कारोबारी भी समझ रहे हैं कि साफ-सफाई और गुणवत्ता के मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

व्यवसाय खबर: अक्सर सवाल उठता है कि त्योहार आते ही जांच और छापेमारी तेज हो जाती है, लेकिन त्योहार समाप्त होने के बाद वैसी सक्रियता दिखाई नहीं देती। क्या विभाग की कार्रवाई वास्तव में पूरे साल जारी रहती है?

दीपक अग्रवाल : बिल्कुल। हमारी कार्रवाई पूरे साल चलती रहती है। फर्क केवल इतना है कि त्योहारों के दौरान शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। दीपावली जैसे अवसरों पर बड़ी मात्रा में मिठाइयों का निर्माण और बिक्री होती है। ऐसे समय में नकली, अमानक और कम गुणवत्ता वाली मिठाइयों की शिकायतें अधिक मिलती हैं।

सामान्य दिनों की तुलना में त्योहारों से लगभग 15 दिन से एक महीने पहले ही मिठाइयों का बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हो जाता है। इसलिए विभाग इस अवधि में विशेष निगरानी करता है।

आपको याद होगा कि मैंने स्वयं दुर्ग में कार्रवाई के दौरान लगभग 2500 किलो मिठाई नष्ट करवाई थी। अस्वच्छ परिस्थितियों में बनाई जा रही मिठाइयों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें नष्ट कराया गया।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी समय कार्रवाई नहीं होती। पूरे साल अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सर्विलांस और लीगल सैंपल लिए जाते हैं। हमारा कार्यक्षेत्र केवल मिठाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करना हमारी जिम्मेदारी है।

व्यवसाय खबर : खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट आने में अक्सर काफी समय लग जाता है। इससे उपभोक्ताओं को यह पता नहीं चल पाता कि संबंधित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता जांच में कैसी पाई गई। इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

दीपक अग्रवाल : आपकी बात सही है कि पहले रिपोर्टिंग में कुछ देरी होती थी। इसका प्रमुख कारण यह है कि छत्तीसगढ़ में अभी केवल एक सरकारी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला है और उसकी जांच क्षमता भी सीमित है।

हालांकि, FSSAI https://vyavasaykhabar.com के निर्देशों के अनुसार अब निजी अनुबंधित प्रयोगशालाओं में भी नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट जल्द प्राप्त हो, इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

अच्छी बात यह है कि इस बार रिपोर्ट आने की समय-सीमा पहले की तुलना में कम हुई है। रक्षाबंधन के दौरान लिए गए अधिकांश नमूनों की रिपोर्ट त्योहार के आसपास ही प्राप्त हो गई थी। शेष रिपोर्ट भी कुछ दिनों बाद आ गई थीं।

दीपावली के नमूनों को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अधिक से अधिक रिपोर्ट त्योहार से पहले प्राप्त हो जाएं।

कुछ संवेदनशील मामलों में, जैसे पनीर आदि के संदिग्ध उत्पादों में, रिपोर्ट आने तक संबंधित सामग्री को सीज करके रखा जाता है, ताकि वह बाजार में न पहुंच सके।

व्यवसाय खबर : नई सरकारी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला को लेकर क्या तैयारी है? इससे जांच रिपोर्ट आने में होने वाली देरी कितनी कम हो सकेगी?

दीपक अग्रवाल : हम एक नई सरकारी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए वेयरहाउस कॉरपोरेशन से भवन हैंडओवर लिया जा चुका है। अब CGMSC के माध्यम से टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।

नई प्रयोगशाला की क्षमता वर्तमान प्रयोगशाला की तुलना में काफी अधिक होगी। हमारा प्रयास है कि इसे एक वर्ष के भीतर शुरू कर दिया जाए। इसके शुरू होने से खाद्य नमूनों की जांच क्षमता बढ़ेगी और रिपोर्ट भी अपेक्षाकृत कम समय में प्राप्त हो सकेंगी।

व्यवसाय खबर : क्या विभाग केवल कार्रवाई पर ध्यान दे रहा है या खाद्य कारोबारियों को जागरूक और प्रशिक्षित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं?

हमने राज्य स्तर पर भी बैठक आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसमें मंत्री जी की उपस्थिति में रायपुर के चैंबर और व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाकर खाद्य सुरक्षा नियमों की जानकारी दी जाएगी।

दीपक अग्रवाल : बिल्कुल। यह केवल कार्रवाई करने का विषय नहीं है। हमारे जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे व्यापारी संगठनों की बैठक बुलाएं और खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता तथा गुणवत्ता संबंधी मानकों के प्रति जागरूक करें।

खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है। नेस्ले कंपनी के वित्तीय सहयोग से विभिन्न जिलों में लगभग 2000 लोगों को प्रशिक्षण दिलाया गया है। इसके अलावा विभागीय अधिकारी भी लगातार प्रशिक्षण दे रहे हैं।

रेस्टोरेंट संचालकों को भी मैंने व्यक्तिगत रूप से पत्र जारी कर बताया है कि उन्हें किन-किन नियमों और स्वच्छता मानकों का पालन करना आवश्यक है।

हमारी कोशिश है कि पहले कारोबारियों को जागरूक किया जाए, उन्हें नियमों की जानकारी दी जाए और प्रशिक्षण दिया जाए। लेकिन इसके बावजूद यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

व्यवसाय खबर : खाद्य सुरक्षा की इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए क्या विभाग के पास पर्याप्त अधिकारी और कर्मचारी हैं? विशेषकर रायपुर जैसे बड़े शहर में क्या स्थिति है?

दीपक अग्रवाल : यह बात सही है कि हमारे पास आवश्यकता के अनुरूप अमला अभी कम है। उदाहरण के लिए रायपुर जैसे बड़े शहर में नियमित रूप से केवल तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि शहर का क्षेत्र काफी बड़ा है। नगर निगम में 70 वार्ड और आठ जोन हैं। ऐसे में प्रभावी निगरानी के लिए अधिक अधिकारियों की आवश्यकता है।

प्रदेश स्तर पर भी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पदों की कमी है। पहले अभिहित अधिकारी का काम एसडीएम देखते थे, लेकिन उनके पास अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी होती थीं। इससे लाइसेंसिंग और पंजीयन जैसे कामों में समय लगता था।

अब हमने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को पदोन्नत कर अभिहित अधिकारी बनाया है। प्रदेश के 33 जिलों में से 31 जिलों में अभिहित अधिकारी पदस्थ हो चुके हैं। केवल दो पद रिक्त हैं।

इस प्रक्रिया के कारण खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पदों पर कुछ कमी आई है। नमूना सहायक के पदों के लिए व्यापमं द्वारा परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और परिणाम भी जारी हो चुके हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सीधी भर्ती के लिए भी प्रस्ताव व्यापमं को भेजा गया है।

इसके अलावा नए बजट में अधिक पदों का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। पांच वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पद भी स्वीकृत हुए हैं। हमारा प्रयास है कि जहां अधिक आवश्यकता है, वहां पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध कराए जाएं।

व्यवसाय खबर: क्या खाद्य पदार्थों की जांच और नमूना संग्रह की यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू है? छोटे जिलों और दूरस्थ क्षेत्रों में भी निगरानी की जा रही है?

दीपक अग्रवाल : हां, यह पूरे प्रदेश में चलने वाली प्रक्रिया है। सभी जिलों में खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं। प्रत्येक खाद्य सुरक्षा अधिकारी के लिए मासिक स्तर पर लीगल और सर्विलांस सैंपलिंग का लक्ष्य निर्धारित होता है। यह FSSAI के निर्देशों के अनुरूप किया जाता है।

रायपुर बड़ा क्षेत्र होने के कारण यहां नमूनों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है। वहीं दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे जिलों में क्षेत्र एवं कारोबार के आकार के अनुसार नमूनों की संख्या अलग होती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि छोटे जिलों में जांच नहीं होती। वहां भी मिठाई, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जा रहे हैं।

हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित हो।

व्यवसाय खबर: अब तक की जांच में सबसे अधिक शिकायतें किन खाद्य पदार्थों को लेकर सामने आई हैं? क्या मिठाई और पनीर सबसे ज्यादा चिंता का विषय हैं?

दीपक अग्रवाल : छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर को लेकर हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। हमारे द्वारा लिए गए एनालॉग पनीर के नमूनों में अधिकांश नमूने अमानक या असुरक्षित पाए गए थे। इसी आधार पर माननीय मंत्री जी के निर्णय के अनुसार प्रदेश में एनालॉग पनीर के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध लगाया गया है।

वर्तमान में त्योहारों का समय है, इसलिए हमारा विशेष ध्यान मिठाइयों पर है। इसके बाद रेस्टोरेंट की जांच पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

रेस्टोरेंट से भी शिकायतें मिलती हैं कि खाद्य पदार्थों को सही तरीके से नहीं रखा जाता। उदाहरण के लिए यदि कोई रेस्टोरेंट शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थ तैयार करता है, तो उनके लिए निर्धारित अलग-अलग रसोई और भंडारण संबंधी मानकों का पालन जरूरी है। कई बार इन नियमों का उल्लंघन भी सामने आता है।

इसके अलावा FSSAI की ओर से हर महीने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सर्विलांस सैंपल लेने के निर्देश मिलते हैं। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पूरे प्रदेश से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं।

व्यवसाय खबर : उपभोक्ताओं के मन में अक्सर सवाल रहता है कि नमूना लेने के बाद उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आया और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई। क्या विभाग जांच और कार्रवाई के आंकड़े नियमित रूप से सार्वजनिक करने जा रहा है?

दीपक अग्रवाल : बिल्कुल। यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है। हमने पहले भी नमूनों की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की है। अब हमने इस प्रक्रिया को और व्यवस्थित करने का निर्णय लिया है।

हमारा प्रयास है कि पूरे साल में लिए गए नमूनों का समेकित विवरण जारी किया जाए। इसमें बताया जाएगा कि कुल कितने नमूने लिए गए, कितनी रिपोर्ट प्राप्त हुईं और उनमें से कितने नमूने अमानक, असुरक्षित या मिथ्याछाप पाए गए।

इसके साथ ही मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कम से कम प्रत्येक तीन महीने में एक बार प्रदेश स्तर पर सैंपलिंग और जांच के परिणामों की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सार्वजनिक की जाए।

इससे आम जनता को भी पता चलेगा कि विभाग कहां और किस तरह की कार्रवाई कर रहा है तथा जांच में क्या परिणाम सामने आ रहे हैं। पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।

व्यवसाय खबर : विभाग ने उपभोक्ताओं के लिए WhatsApp हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। क्या इस पर सीधे शिकायत की जा सकती है? क्या शिकायतकर्ता अपनी पहचान गोपनीय रख सकता है?

दीपक अग्रवाल : जी हां। यह विभाग का आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर है। इस पर कोई भी व्यक्ति खाद्य पदार्थों से संबंधित शिकायत या सूचना दे सकता है। इसके लिए हमारे कर्मचारी सक्रिय रहते हैं।
कोई व्यक्ति चाहे तो गोपनीय तरीके से भी शिकायत कर सकता है। शिकायतकर्ता का नाम बताना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा मैंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लिखित शिकायत मिलने पर शिकायतकर्ता को भी सुना जाए। उसकी बात और पक्ष को समझना जरूरी है। शिकायत का निराकरण गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए और शिकायतकर्ता की संतुष्टि को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

पिछले सप्ताह भी मैंने खाद्य एवं औषधि प्रशासन के फील्ड स्तर के अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायतों के निराकरण में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

व्यवसाय खबर : अंत में आम जनता और खाद्य कारोबारियों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

दीपक अग्रवाल : मैं आम जनता से विशेष अपील करना चाहूंगा कि खाद्य पदार्थों, गुटखा, नकली उत्पादों या किसी भी तरह की अनियमितता के संबंध में यदि उन्हें कोई जानकारी मिलती है तो उसे विभाग के साथ जरूर साझा करें। यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान गोपनीय रखना चाहता है तो वह गोपनीय तरीके से भी सूचना दे सकता है।

कई बार ऐसी जानकारियां हमारे संज्ञान में नहीं आ पातीं। जनता से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर विभाग को कार्रवाई करने में काफी मदद मिलती है।

मैं खाद्य कारोबारियों से भी अपील करना चाहूंगा कि वे अपनी श्रेणी के अनुसार अनिवार्य FSSAI पंजीयन या लाइसेंस जरूर प्राप्त करें। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री में स्वच्छता संबंधी सभी मानकों का पालन करें।

हमारा उद्देश्य किसी कारोबारी को अनावश्यक परेशान करना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। इसके लिए आम जनता और कारोबारियों का सहयोग बेहद जरूरी है।

व्यवसाय खबर: आपने अपना महत्वपूर्ण समय दिया और खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी। इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

दीपक अग्रवाल : जी, बहुत-बहुत धन्यवाद।

इंटरव्यू की पांच बड़ी बातें

  1. हर तीन महीने में रिपोर्ट सार्वजनिक: प्रदेश में लिए गए खाद्य नमूनों, प्राप्त जांच रिपोर्ट और अमानक उत्पादों का विवरण जारी करने की तैयारी।
  2. एक साल में नई सरकारी लैब: अत्याधुनिक खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला शुरू करने का लक्ष्य।
  3. 2500 किलो मिठाई नष्ट: दुर्ग में अस्वच्छ परिस्थितियों में बनाई जा रही मिठाई पर कार्रवाई।
  4. खाद्य सुरक्षा अमले का विस्तार: अधिकारियों की सीधी भर्ती का प्रस्ताव और पांच वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पद स्वीकृत।
  5. गोपनीय शिकायत की सुविधा: उपभोक्ता WhatsApp हेल्पलाइन 9340597097 पर पहचान गोपनीय रखकर सूचना दे सकते हैं।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सूचना: खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, मिलावट या स्वच्छता से जुड़ी शिकायत विभाग के WhatsApp हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर की जा सकती है।

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