ताजा खबरअपडेटएजुकेशनखेतीजागरूक करने जैसे कार्यसमाचार

अरुणाचल प्रदेश: आईसीएआर बासार ने टिकाऊ मृदा प्रबंधन पर “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया

अभियान का लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करना और मिट्टी की सेहत में सुधार लाना

बासार, 2 जून 2026:ICAR Research Complex for NEH Region ने Khet Bachao Abhiyan के शुभारंभ के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम 1 जून को ICAR-Krishi Vigyan Kendra के सहयोग से आयोजित किया गया।Arunachal Pradesh: ICAR Basar launches “Khet Bachao Abhiyaan” on sustainable soil management

यह राष्ट्रव्यापी अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन, हरी खाद, जैविक खाद तथा जैव-उत्पादों के उपयोग के प्रति जागरूक करना है। अभियान का लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करना और मिट्टी की सेहत में सुधार लाना है।

यह अभियान भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan के संरक्षण में चलाया जा रहा है।

25 किसानों ने लिया भाग

कार्यक्रम में Leparada district और West Siang district के विभिन्न गांवों से आए 25 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय सतत मृदा प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां था।

डॉ. जोकेन बाम ने दिया संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

Dr. Joken Bam, प्रभारी प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग तथा जैविक और टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की अपील की।

मिलेट और तोरिया फसलों में संतुलित पोषण पर चर्चा

Dr. Manoj Kumar, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने बताया कि मिलेट (मोटे अनाज) और तोरिया जैसी फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग तथा बाद में हरी खाद वाली फसलों की खेती से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और फसल चक्र की तीव्रता बढ़ती है। इस अवसर पर मिलेट उत्पादन तकनीक और फसल प्रबंधन से संबंधित दो प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।

अम्लीय मिट्टी में चूने के प्रयोग की सलाह

Dr. Ampee Tasung ने मृदा संरक्षण पर बोलते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में अम्लीय मिट्टी एक बड़ी समस्या है। उन्होंने ऐसी मिट्टी में चूने (Lime) के उपयोग की सलाह दी। साथ ही कृषि और झूम खेती वाले क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत (Terrace Farming) बनाने पर जोर दिया ताकि मिट्टी की नमी बनी रहे और कटाव कम हो।

अन्य वैज्ञानिकों ने भी किसानों से किया संवाद

कार्यक्रम में निम्न वैज्ञानिकों ने भी किसानों को मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी:

  • Dr. Thejangulie Angami – फल विज्ञान
  • Dr. B.K.D. Borah – पशु प्रजनन
  • Dr. S.K. Pandey – कृषि विज्ञान
  • Dr. P.K. Zeliang – पौधा प्रजनन एवं आनुवंशिकी
  • Dr. Rajesh A. Alone – कृषि वानिकी
  • Dr. Gerik Bagra – तकनीकी अधिकारी

वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, सॉयल हेल्थ कार्ड और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

मुख्य उद्देश्य

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना
  • रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग
  • जैविक एवं हरी खाद को बढ़ावा देना
  • किसानों को मृदा परीक्षण के प्रति जागरूक करना
  • टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि को प्रोत्साहित करना

यह अभियान अरुणाचल प्रदेश के किसानों को बेहतर मिट्टी प्रबंधन और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

Load More Posts Loading...No More Posts.