Featuredअपडेटएजुकेशनजागरूक करने जैसे कार्यताजा खबरनवाचारप्रादेशिक-जिलाराजनीतिरोजागारसमाचार

सुकमा: बंदूक छोड़कर विकास की राह पर लौटे युवा, पुनर्वास बना नई मिसाल

रायपुर/सुकमा, 06 जून 2026: बस्तर के Sukma district से एक प्रेरणादायक बदलाव की कहानी सामने आई है, जहाँ कभी नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे युवा अब विकास की मुख्यधारा में लौटकर नया भविष्य गढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास योजना के तहत जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी के सहयोग से आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री प्रशिक्षण दिया जा रहा है। Sukma: Youths leave guns and return to the path of development, rehabilitation becomes a new example

अब तक 280 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार की दिशा में जोड़ा जा चुका है।

हथियारों से निर्माण तक का सफर

इस पहल के तहत 25 आत्मसमर्पित युवाओं—जिनमें 13 महिलाएँ और 12 पुरुष शामिल हैं—को भवन निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये युवा अब ईंट जोड़ने, दीवार बनाने और आधुनिक निर्माण तकनीकों को सीखकर भविष्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जैसे कार्यों में योगदान देंगे।

जिन हाथों में कभी हथियार थे, वे अब गरीबों के लिए घर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

सोड़ी हूंगी और पदम रैनू की नई शुरुआत

कोंटा क्षेत्र की Sodi Hoongi बताती हैं कि आत्मसमर्पण के बाद अब उन्हें सम्मान और आत्मनिर्भरता का अवसर मिला है। वहीं जगरगुंडा के Padam Renu कहते हैं कि सरकार ने उन्हें भटकाव से निकालकर जीने का नया रास्ता दिया है।

पुनर्वास से बदलता बस्तर

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को माप-जोख, चिनाई, प्लास्टर और निर्माण तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल रोजगार नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्निर्माण का माध्यम है।

कलेक्टर Amit Kumar के अनुसार, आत्मसमर्पण का उद्देश्य केवल हिंसा छोड़ना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देना है।

विकास और रोजगार की नई राह

यह पहल न केवल युवाओं के जीवन में बदलाव ला रही है, बल्कि जिले में निर्माण कार्यों की गति भी बढ़ा रही है। प्रशिक्षित युवा अब स्थानीय स्तर पर कुशल श्रमिक के रूप में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और विकास योजनाओं को गति दे रहे हैं।

निष्कर्षBastar region में यह परिवर्तन दर्शाता है कि सही अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर भटके हुए युवा भी समाज की मुख्यधारा में लौटकर विकास के मजबूत आधार बन सकते हैं। सुकमा की यह कहानी संघर्ष से उम्मीद और हिंसा से विकास की ओर बढ़ते नए बस्तर की पहचान बन रही है।

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *