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King Mahendra Story: कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं, घर की गरीबी देख गांव छोड़ा, मुंबई गए तो ‘किंग’ बनकर लौटे महेंद्र

बिहार के उद्योगपति: केवल व्यवसाय नहीं, समाज निर्माण की प्रेरक शक्ति

बिहार। जब भी उद्योगपतियों की चर्चा होती है, तो अक्सर लोगों के मन में विशाल कारखानों, करोड़ों के कारोबार और मुनाफे की तस्वीर उभरती है। लेकिन किसी भी उद्योगपति का वास्तविक मूल्यांकन केवल उसकी संपत्ति या कंपनी के आकार से नहीं किया जाना चाहिए। एक सच्चे उद्योगपति की सबसे बड़ी पहचान यह होती है कि उसने अपने समाज, अपने क्षेत्र और अपने लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

बिहार के कई उद्योगपतियों ने इस कसौटी पर खुद को साबित किया है। उन्होंने केवल कंपनियाँ नहीं खड़ी कीं, बल्कि हजारों-लाखों परिवारों के जीवन को नई दिशा दी। उनके प्रयासों से युवाओं को रोजगार मिला, आत्मसम्मान मिला और अपने ही राज्य में रहकर आगे बढ़ने का अवसर भी प्राप्त हुआ।

जहानाबाद के स्वर्गीय महेंद्र प्रसाद इस दिशा में एक प्रेरक उदाहरण हैं। उन्होंने ARISTO Pharma जैसी प्रतिष्ठित फार्मास्यूटिकल कंपनी की स्थापना की, जिसने बिहार की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इस कंपनी की विशेष उपलब्धि यह रही कि इसमें बिहार के हजारों युवाओं को रोजगार और करियर का अवसर मिला, जिससे उनका जीवन आर्थिक रूप से सशक्त हुआ।

हालाँकि आज महेंद्र प्रसाद हमारे बीच नहीं हैं और समय के साथ पारिवारिक परिस्थितियों में परिवर्तन आया है, लेकिन उनकी स्थापित की गई ARISTO Pharma आज भी मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक सुदृढ़ और दीर्घकालिक संस्था का निर्माण किया था।

इसी प्रकार बिहार के आर.के. सिन्हा ने SIS (Security and Intelligence Services) की स्थापना कर एक छोटे प्रयास को विशाल उद्योग में बदल दिया। आज यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी निजी सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं में से एक है, जिसकी उपस्थिति देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है।

SIS की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि इसने बिहार के हजारों युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण का अवसर दिया। गांवों और छोटे शहरों से आए युवाओं को इस संस्था ने न केवल नौकरी दी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी दिखाया। आज उनके पुत्र रितुराज सिन्हा कंपनी का नेतृत्व संभाल रहे हैं और संस्था निरंतर प्रगति कर रही है।

वास्तव में बिहार में ऐसे कई उद्योगपति हैं, जिनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर उतने चर्चित नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने क्षेत्र और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन लोगों ने उद्योग को केवल लाभ का साधन नहीं माना, बल्कि इसे रोजगार सृजन और सामाजिक विकास का माध्यम बनाया।

औद्योगिक पिछड़ेपन जैसी चुनौतियों से जूझता रहाबिहार लंबे समय तक पलायन, बेरोजगारी और औद्योगिक पिछड़ेपन जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में जिन उद्यमियों ने राज्य के युवाओं को अवसर दिया, उन्हें प्रशिक्षण दिया और उनकी क्षमता पर भरोसा किया, उनका योगदान केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इन उद्योगपतियों ने बिहार को उतना ही लौटाया यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इन उद्योगपतियों ने बिहार को उतना ही लौटाया है, जितना उन्होंने यहां से पाया। उन्होंने रोजगार दिया, आत्मविश्वास दिया और यह साबित किया कि बिहार के युवा किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं—बस उन्हें सही अवसर मिलना चाहिए। इसी कारण आज भी बिहार के गांवों और शहरों में ऐसे उद्योगपतियों का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल सफल व्यवसायी नहीं, बल्कि समाज निर्माण के सशक्त स्तंभ के रूप में देखे जाते हैं।

बिहार के विकास का मार्ग केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत उद्योग, निवेश और व्यापक रोजगार सृजन से होकर गुजरता है। ऐसे में उन उद्योगपतियों का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जिन्होंने यह सिद्ध किया कि उद्योग केवल मुनाफे का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण का प्रभावी साधन भी हो सकता है।

जहानाबाद जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर मोदनगंज प्रखंड के गोविंदपुर गांव के एक साधारण भूमिहार परिवार में महेंद्र प्रसाद का जन्म हुआ था पिता वासुदेव सिंह एक अत्यंत साधारण किसान थे. घर की तंग हालत को देखते हुये 1964 में वे गांव छोड़कर मुंबई चले गए थे. आखिरकार वहां दवा इंडस्ट्री में प्रतिष्ठित होने के बाद वे तकरीबन 16 साल बाद वह जहानाबाद 1980 में लोकसभा चुनाव लड़ने लौटे. उन्होंने सीपीआई से धमाकेदार जीत दर्ज की.

कई सामाजिक कार्यों के लिए किए जाएंगे यादकिंग महेंद्र के कई सामाजिक कार्य जहानाबाद में देखने को मिलती है. स्थानीय लोगों की मांग पर गरीब और वंचित लोगों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ओकरी, जहानाबाद में एक कॉलेज की शुरुआत की. इससे उन लड़कियों को भी मदद मिली जी ने उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती थी. उनके परोपकारी कार्यों ने उन्हें युवाओं के बीच एक कल्ट के रूप में स्थापित कर दिया. उनके साथ साये की तरह रहने वाले भाई और अरिस्टो फार्मा के एमडी उमेश शर्मा उर्फ भोला बाबू ने बताया कि भैया के सपनों को हर हाल में पूरा किया जाएगा और विकास और सेवा का सफर जारी रहेगा.

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