भीगी रात में भी नहीं डिगा उत्साह, 70 स्वयंसेवकों ने किया शताब्दी वर्ष का पथ संचलन”
रायपुर । तेज बारिश, बादलों की भयंकर गर्जना और अंधेरी रात… लेकिन इन सबके बीच भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, टिकरापारा नगर के स्वयंसेवकों का उत्साह और अनुशासन तनिक भी डगमगाया नहीं। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कौमुदी पथ संचलन ने टिकरापारा नगर की सड़कों पर राष्ट्रभक्ति, साहस और संगठन शक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।
कदम से कदम मिलाकर संचलन में आगे बढ़ते रहेरात्रि में निकलने वाले इस विशेष पथ संचलन का निर्धारित समय होते ही आसमान से मानो जलप्रलय उतर पड़ा। तेज बारिश और बिजली की कड़क के बावजूद स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम को स्थगित नहीं किया। समय पालन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए स्वयंसेवक पूरे अनुशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर संचलन में आगे बढ़ते रहे।
स्वयंसेवकों का जोश उतना ही बढ़ता गयाबारिश जितनी तेज होती गई, स्वयंसेवकों का जोश उतना ही बढ़ता गया। भीगते गणवेश, घोष की गूंज और अनुशासित कदमताल के साथ संचलन जब नगर के मार्गों से गुजरा, तो राहगीर भी ठहरकर इस दृश्य को देखने लगे। कई स्थानों पर लोगों ने “जय श्री राम” के गगनभेदी नारों से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।
कुछ जवानों ने इसे “राष्ट्रभक्ति का साक्षात दर्शन” बतायासुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिस जवान भी इस दृश्य से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। अनेक पुलिसकर्मियों ने स्वयंसेवकों को सैल्यूट कर सम्मान व्यक्त किया। कुछ जवानों ने इसे “राष्ट्रभक्ति का साक्षात दर्शन” बताया।
संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम
इस अवसर पर मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख संजय तिवारी ने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ऐसे पथ संचलनों का उद्देश्य समाज में एकता, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत होकर युवाओं की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम में लगभग 70 स्वयंसेवकों ने संचलन में भाग लिया, जबकि दर्जनों संघ अधिकारी और कार्यकर्ता व्यवस्था में सक्रिय रहे।
क्या है कौमुदी पथ संचलन?राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का “कौमुदी पथ संचलन” एक विशेष रात्रिकालीन अनुशासित संचलन है, जो प्रायः पूर्णिमा के आसपास निकाला जाता है। इसमें स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में घोष वादन—आनक, श्रृंग, प्रणव एवं अन्य वाद्य यंत्रों—के साथ राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देते हुए संचलन करते हैं। यह संघ के अनुशासन, संगठन शक्ति और “पंच प्रण” के संदेश को समाज तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है।
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