नियद नेल्ला नार योजना 2.0 से रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा, 50,053 युवाओं का नियोजन।
1,267 आत्मसमर्पित माओवादियों को प्रशिक्षण दिया गया है और 461 प्रशिक्षणरत हैं
व्यवसाय खबर डॉट कॉम A new dawn of peace and employment in Bastar, more than 50 thousand youth got employment.
रायपुर, 28 अक्टूबर 2026। कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर में अब शांति, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की नई राह खुल रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से आत्मसमर्पित माओवादी और नक्सल प्रभावित परिवारों के युवा हुनर सीखकर सम्मानजनक आजीविका की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की पहल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पर विशेष जोर दे रही है। इसके तहत प्रदेश में अब तक 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से 2,323 को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

इलेक्ट्रिशियन से लेकर सिलाई तक का प्रशिक्षणप्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर, दोपहिया-चारपहिया वाहन मरम्मत तकनीशियन और सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे व्यवसायों में दक्ष बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार रोजगार तथा स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। बीजापुर में कुछ प्रशिक्षित युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री और सिलाई कार्य में अवसर मिले हैं। वहीं बस्तर में युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि और श्रम कार्यों से जोड़ा गया है।
नियद नेल्ला नार योजना से 50 हजार से अधिक युवाओं को रोजगारबस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्ला नार योजना 2.0 विकास और विश्वास का माध्यम बन रही है। योजना के अंतर्गत 10 जिलों में अब तक 1,11,165 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 50,053 युवाओं को नियोजित किया गया है। इनमें 1,267 आत्मसमर्पित माओवादियों को प्रशिक्षण दिया गया है और 461 प्रशिक्षणरत हैं। वहीं, नक्सल हिंसा से प्रभावित 779 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है तथा 191 प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
छह पुनर्वास केंद्र बने प्रशिक्षण प्रदातापुनर्वास को प्रभावी बनाने के लिए बस्तर संभाग के आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर शामिल हैं। दस्तावेजों के अभाव में पात्र युवाओं को प्रशिक्षण से वंचित न होना पड़े, इसके लिए आधार पंजीयन संबंधी नियमों में भी विशेष छूट दी गई है।

दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बीजापुर में असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम के तहत 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू हुआ है। वहीं, आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए 780 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।








