ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह में 688 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
रायगढ़, 1 अगस्त। राज्यपाल रमेन डेका ने युवाओं से ज्ञान, नवाचार और नैतिक मूल्यों के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान को विवेक, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जनकल्याण में उपयोग करना है। एक शिक्षित व्यक्ति की पहचान उसके प्रमाण-पत्रों से नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उसके योगदान से होती है।


राज्यपाल शनिवार को रायगढ़ स्थित ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और स्कूल ऑफ साइंस के 688 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण, 28 को रजत और 29 विद्यार्थियों को कांस्य पदक देकर सम्मानित किया गया।


राज्यपाल ने कहा कि आज का दौर तेजी से बदलती तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का है। ऐसे समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि उन्हें ऐसे युवा तैयार करने होंगे, जिनमें नेतृत्व क्षमता, अनुसंधान की सोच, सामाजिक संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का समावेश हो।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो समाज के लिए स्थायी रूप से लाभकारी हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा अपनी प्रतिभा, ज्ञान और संस्कारों के बल पर देश के विकास तथा समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
समारोह में जिंदल स्टील के चेयरमैन एवं सांसद नवीन जिंदल, विश्वविद्यालय की चांसलर शालू जिंदल, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल, जिंदल स्टील रायगढ़ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर देबोज्योति रॉय तथा कुलपति डॉ. आर.डी. पाटीदार सहित अनेक शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि और अभिभावक उपस्थित रहे। समारोह में विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।







