एक ही परिसर में 10 प्लांट, रोज 400 मीट्रिक टन उत्पादन; स्वाद से सेहत तक का सफर तय कर रहा अमूल
आणंद (गुजरात)।जब अमूल का नाम आता है तो सबसे पहले दूध, मक्खन या चॉकलेट याद आती है, लेकिन गुजरात के आणंद स्थित अमूल परिसर की दुनिया इससे कहीं आगे है। यहां एक ही परिसर में 10 अत्याधुनिक खाद्य संयंत्र संचालित होते हैं, जहां प्रतिदिन करीब 400 मीट्रिक टन खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यही वह जगह है जहां एक ओर प्रीमियम चॉकलेट बनती है, तो दूसरी ओर आंगनबाड़ी के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पोषणयुक्त आहार भी तैयार होता है।
गुजरात के पांच दिवसीय अध्ययन दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को अमूल चॉकलेट प्लांट के सहायक प्रबंधक कमल प्रजापति ने इस विशाल उत्पादन परिसर की कार्यप्रणाली से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि 1973 में शुरू हुआ यह परिसर आज चॉकलेट, फ्रोजन फूड, मिठाइयों, पराठों, सब्जियों, ग्रेवी, पीनट बटर, केचप, मेयोनीज और पोषण आहार जैसे विविध उत्पादों का प्रमुख उत्पादन केंद्र बन चुका है।
व्यवसाय खबर डॉट कॉम ने दी खबरों को विशेष जगह
व्यवसाय जगत, उद्योग, लाइफस्टाइल और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को व्यवसाय खबर डॉट कॉम ने हमेशा प्रमुखता के साथ स्थान दिया है। इसी कड़ी में अमूल के आणंद परिसर, प्रीमियम लाइफस्टाइल इवेंट्स और नई तकनीकों से जुड़ी खबरों को भी विशेष कवरेज प्रदान किया गया है।
हर दिन 100 मीट्रिक टन चॉकलेट का उत्पादन
अमूल की चॉकलेट यात्रा लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। वर्ष 2025 में क्षमता विस्तार के बाद यहां प्रतिदिन 100 मीट्रिक टन चॉकलेट बनाने की क्षमता विकसित हो चुकी है। अमूल अब 75 से अधिक वैरायटी की चॉकलेट तैयार करता है, जिनमें 55, 75, 90 और 99 प्रतिशत कोको सॉलिड्स वाली डार्क चॉकलेट भी शामिल है। कंपनी का दावा है कि उसकी शुद्ध चॉकलेट में पाम ऑयल कावती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम उपयोग नहीं किया जाता।
बच्चों और माताओं के पोषण की भी जिम्मेदारी
यही परिसर गुजरात सरकार की टेक-होम राशन योजना के लिए भी पोषणयुक्त खाद्य मिश्रण तैयार करता है। दाल और अनाज आधारित यह फोर्टिफाइड पाउडर छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पहुंचाया जाता है।
गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
अमूल के हर उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं में रासायनिक, माइक्रोबियल और शेल्फ लाइफ से जुड़े वैज्ञानिक परीक्षण किए जाते हैं। प्राकृतिक रंगों के उपयोग चॉकलेट निर्माण के लिए आवश्यक कोको दक्षिण भारत के किसानों और सहकारी संस्थाओं से खरीदा जाता है, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलता है और सहकारी मॉडल को मजबूती मिलती और गुणवत्ता नियंत्रण की सख्त व्यवस्था इस परिसर की विशेष पहचान है।
अमूल केवल उत्पाद नहीं बनाता, बल्कि किसानों को भी मजबूत करता है। चॉकलेट निर्माण के लिए आवश्यक कोको दक्षिण भारत के किसानों और सहकारी संस्थाओं से खरीदा जाता है, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलता है और सहकारी मॉडल को मजबूती मिलती है।
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आणंद का यह परिसर केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि स्वाद, पोषण, तकनीक और सहकारिता का संगम है। यहां चॉकलेट की मिठास और पोषण की शक्ति साथ-साथ तैयार होती है, जो अमूल की “सहकार से समृद्धि” की सोच को साकार करती है।
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