मासूम को मिली नई जिंदगी :20 प्रतिशत ही धड़क रहा था दिल, एएलकापा बीमारी की चली 7 घंटे सर्जरी
बाक्स में तीन लाख बच्चों में एक को होने वाली दुर्लभ एएलकापा बीमारी से जूझ रहा था मासूम प्रो. डॉ. नितिन कश्यप और डॉ. जी सौरभ की टीम ने किया सफल ऑपरेशन
रायपुर।एम्स के डॉक्टरों ने एक बार फिर धरती के भगवान के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। जिसका ताजा उदाहरण एएलकापा नामक दुर्लभ बीमारी के सफल उपचार में देखा गया। 10 महीने का मासूम एएलकापा (एनॉमलस लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी फ्राम पल्मोनरी आर्टरी) जानलेवा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित था।
मासूम का दिल केवल 20 प्रतिशत क्षमता से धड़क रहा था और उसकी हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी। कई बड़े अस्पतालों से निराश होने के बाद परिजन बच्चे को एम्स रायपुर लेकर पहुंचे, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने करीब 7 घंटे तक चली जटिल सर्जरी कर बच्चे की पूरी धड़कन ही नहीं लौटाई, बल्कि एक नई जिंदगी दी।
संस्थान की बड़ी उपलब्धि
एम्स के कार्यपालक निदेशक डॉ. अशोक जिंदल ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब छत्तीसगढ़ में ही हाई-रिस्क और जटिल बाल हृदय सर्जरी की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है।
हार्ट फेलियर का बढ़ गया था खतरा एम्स के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुरेंद्र नायक ने बताया कि जब मासूम को अस्पताल लाया गया, तब उसकी हालत बेहद नाजुक थी। जांच में सामने आया कि बच्चे के दिल की कार्यक्षमता यानी लेफ्ट वेंट्रिकुलर इजेक्शन फैक्शन केवल 20 प्रतिशत रह गया था। इसके साथ ही उसे गंभीर माइट्रल रिगर्जिटेशन की समस्या भी थी, जिसमें हृदय के वाल्व से खून का उल्टा रिसाव होने लगता है। इस वजह से हार्ट फेलियर का खतरा लगातार बढ़ रहा था। इसके बाद एम्स ने कार्डियोलॉजी, सीटीवीएस, कार्डियक एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी और पीडियाट्रिक्स विभाग के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित की। प्रो. डॉ. नितिन कश्यप और पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डॉ. जी सौरभ के नेतृत्व में टीम ने जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।
दो दिन वेंटिलेटर पर रहा मासूम डॉक्टरों ने बताया कि जटिल हार्ट सर्जरी के बाद शुरुआती 24 घंटे बच्चे के लिए बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण थे। मासूम को लगातार गहन निगरानी में रखा गया, दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। सतत मॉनिटरिंग और उपचार का सकारात्मक असर दिखा, बच्चे की हालत में तेजी से सुधार होने लगी। धीरे-धीरे उसकी हृदय कार्यक्षमता में सुधार हुआ और नौवें दिन उसे स्वस्थ एवं स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
एएलकापा बीमारी क्या है इस बीमारी में दिल की मुख्य कोरोनरी धमनी गलत तरीके से पल्मोनरी आर्टरी से जुड़ जाती है, जिससे हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजनयुक्त रक्त नहीं मिल पाता और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य बाईं कोरोनरी धमनी को सही जगह यानी महाधमनी से जोड़ना होता है ताकि दिल को सामान्य रक्त और ऑक्सीजन मिल सके। डॉक्टरों के मुताबिक यह बीमारी लगभग तीन लाख बच्चों में से किसी एक को होती है।
सर्जरी कब जरूरी होती है? –सांस फूलना -दूध पीने या खाने में कमजोरी (बच्चों में) -अत्यधिक पसीना -सीने में दर्द -हार्ट फेल्योर के संकेत