खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया जी का सतत प्रयास है कि देश के हर क्षेत्र में छिपी प्रतिभाओं को अवसर मिले
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के उप-महानिदेशक आईपीएस मयंक श्रीवास्तव से खेलो इंडिया की नई कार्ययोजना, खिलाड़ियों के वैज्ञानिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान पर विशेष चर्चा
प्रमुख बातें
वर्ष 2036 तक भारत विश्व के शीर्ष 10 खेल देशों में शामिल हो
वर्ष 2047 तक विश्व के शीर्ष पांच खेल देशों में अपनी जगह बनाए
प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास पर कार्य कर रहा है
पहले की तुलना में आठ गुना अधिक बजट का प्रावधान किया गया
फीफा वर्ल्ड कप में 48 देश हिस्सा लेते हैं, लेकिन भारत उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया
मयंक श्रीवास्तव जी के ‘व्यवसाय खबर डॉट कॉम – माटी के लाल’ वाले इंटरव्यू की ऑडियो सुन सकते हैं।
विशेष साक्षात्कार
छत्तीसगढ़रायपुर।मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारीमयंक श्रीवास्तवआज प्रशासन, पुलिस सेवा और खेल प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। छत्तीसगढ़ कैडर के वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी श्रीवास्तव ने अपने सेवाकाल में राज्य के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिलों में जिम्मेदारियां संभालीं। बस्तर, दुर्ग, बिलासपुर और कोरबा जैसे प्रमुख जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने उल्लेखनीय सेवाएं दीं।

पुलिस सेवा के दौरान कानून-व्यवस्था और जनसरोकार से जुड़े दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाने के बाद उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नई भूमिका संभाली। वर्तमान में वे भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के उप-महानिदेशक के रूप में देश की खेल प्रतिभाओं को बेहतर अवसर, सुविधाएं और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि एक अधिकारी की भूमिका केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज और देश के विकास के विभिन्न क्षेत्रों में भी अपना योगदान दे सकता है।
इसी प्रेरक व्यक्तित्व और बहुआयामी कार्ययात्रा को जानने-समझने के लिए व्यवसाय खबर डॉट कॉम के विशेष ‘माटी के लाल’ सेगमेंट में आईपीएस मयंक श्रीवास्तव खास मेहमान रहे। पुलिस सेवा से लेकर खेल प्रतिभाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन तक का उनका अनुभव निश्चित रूप से युवाओं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है।
विशेष साक्षात्कार में उनसे भारत सहित छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास, खेलो इंडिया की नई कार्ययोजना, खिलाड़ियों के वैज्ञानिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, प्रतिभा चयन और भविष्य की खेल प्राथमिकताओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…
प्रश्न: साई छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए किस तरह काम कर रहा है?

उत्तर: स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया योजना को और मजबूत किया है। नए खेलो इंडिया कार्यक्रम में पहले की तुलना में आठ गुना अधिक बजट का प्रावधान किया गया है, जिससे अधिक संख्या में खिलाड़ियों को सहायता मिल सकेगी। साई दो स्तरों पर काम करता है। पहला, खेलो इंडिया के माध्यम से और दूसरा अपने प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए। साई के रीजनल सेंटर, नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, साई ट्रेनिंग सेंटर और एक्सटेंशन सेंटर में खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण, रहने, खाने और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
प्रश्न: खेलो इंडिया योजना में क्या बदलाव किए गए हैं?

उत्तर:देखिए, पहले खेलो इंडिया एक 360 डिग्री सहायता प्रणाली के रूप में काम करता था, लेकिन अब इसे 720 डिग्री सहायता प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले हर जिले में खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेलो इंडिया केंद्र बनाए गए थे, जहां खेल सामग्री और प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई। अब इसके नए स्वरूप में इसका दायरा और बढ़ाया गया है। खेलो इंडिया के तहत खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाकर तीस हजार तक की गई है और उभरते हुए खिलाड़ियों को विशेष सहायता प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही जिला स्तर पर खेल विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। स्कूल, महाविद्यालय और निजी संस्थानों में उपलब्ध खेल सुविधाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा, ताकि मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। खिलाड़ियों के लिए खेल विज्ञान, बेहतर प्रशिक्षण और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके अलावा पिछले खेलो इंडिया में 300 से अधिक खेल बुनियादी ढांचे थे, जिसमें नए खेलो इंडिया के तहत इसकी संख्या में कई गुना बढ़ेगी। हमारा उद्देश्य खिलाड़ियों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित सहायता देना नहीं, बल्कि उनके पूरे खेल सफर में प्रशिक्षण, सुविधाएं, खेल विज्ञान, निगरानी और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।
प्रश्न: आधुनिक खेलों में स्पोर्ट्स साइंस की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
उत्तर:आज के दौर में बिना स्पोर्ट्स साइंस के कोई भी खिलाड़ी उच्च स्तर तक नहीं पहुंच सकता। नए खेलो इंडिया कार्यक्रम में कोच के साथ-साथ स्पोर्ट्स साइंस विशेषज्ञों की भूमिका बढ़ाई गई है।
खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक विश्लेषण, फिटनेस, पोषण, रिकवरी और चोट प्रबंधन जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए आईटी आधारित एथलीट मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है।

प्रश्न: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की स्थिति को किस तरह देखते हैं?

उत्तर: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। इसका ताजा उदाहरण ज्ञानेश्वरी यादव को लिया जा सकता है। यहां के युवाओं में प्राकृतिक क्षमता है। हर खेल के लिए अलग-अलग शारीरिक संरचना की आवश्यकता होती है और छत्तीसगढ़ में कई खेलों के लिए उपयुक्त प्रतिभाएं मौजूद हैं। एथलेटिक्स, मिडिल और लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग, हॉकी और तीरंदाजी जैसे खेलों में यहां काफी संभावनाएं हैं। बस्तर क्षेत्र में फुटबॉल और हॉकी की अच्छी प्रतिभाएं हैं। वहीं तीरंदाजी और अन्य खेलों में भी राज्य आगे बढ़ सकता है।
प्रश्न: पूर्व वर्षो की अपेक्षा 2025 पदकों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसका कारण क्या मानते हैं?
उत्तर: इसका सबसे बड़ा कारण खेल संस्कृति का विकास और संस्थागत सहयोग है। 2025 में 14 पदक मिलने के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत ही कही जा सकती है। पहले लोगों में खेल को करियर के रूप में देखने की सोच कम थी, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। खेलो इंडिया, राज्य स्तरीय खेल संस्थान और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं के कारण खिलाड़ियों को विश्वास मिला है। खेल के माध्यम से सरकारी नौकरी मिल रही है। बिलासपुर स्थित स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आधुनिक सुविधाएं और स्पोर्ट्स साइंस की व्यवस्था भी खिलाड़ियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।
प्रश्न: क्या आपका स्थानीय जुड़ाव के कारण छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को अब ज्यादा अवसर मिल रहे हैं?
उत्तर: ऐसा नहीं है। साई र्और भारत सरकार की नीति के साथ खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया जी का सतत यही प्रयास है कि देश के हर क्षेत्र में छिपी प्रतिभाओं को अवसर मिले। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत भी इसी उद्देश्य से हुई कि ऐसे क्षेत्रों तक खेल पहुंचे जहां पहले बड़े स्तर की प्रतियोगिताएं नहीं होती थीं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में ट्राइबल गेम्स के आयोजन से कई प्रतिभाओं की पहचान हुई। जिसका फायदा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मंच मिला।

प्रश्न: प्रदेश में कलरीपयट्टू जैसे स्वदेशी खेलों की संभावनाओं को कैसे देखते हैं?
उत्तर:भारत सरकार की खेलो इंडिया नीति में स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देना शामिल है। कलरीपयट्टू, थांगटा और गतका जैसे खेलों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मलखंब, योग और मार्शल आर्ट जैसे खेलों का अच्छा आधार है। जिसे आनेवाले दिनों में भी बड़े मंच तक पहुंचाया जाएगा। बस्तर क्षेत्र के बच्चों में प्राकृतिक रूप से बेहतर लचीलापन और ताकत देखने को मिलती है, जिससे वे इन खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

प्रश्न: प्रतिभा चयन प्रक्रिया को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर: प्रतिभा चयन प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण जरूरी है। गांवों और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचकर खिलाड़ियों की पहचान करनी होगी। नए खेलो इंडिया कार्यक्रम में स्थानीय टैलेंट स्कॉउट और कम्युनिटी कोच की व्यवस्था की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से भी प्रतिभाओं को सामने लाया जा सकेगा। इसके साथ ही राज्य सरकार भी बेहतर कार्य कर रही है, क्योंकि मिलकर कार्य करने से उसका परिणाम बेहतर होता है।
प्रश्न: छत्तीसगढ़ में आयोजित स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?

उत्तर: स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में खेल विशेषज्ञों, ओलंपियन खिलाड़ियों और खेल विज्ञान विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कॉन्क्लेव का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने किया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक तनुजा सलाम, पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर राजेश चौहान, ओलंपियन जिन्शन जॉनसन सहित कई प्रशिक्षक, पदक विजेता खिलाड़ी और विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान छत्तीसगढ़ को खेल के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इसमें खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण देने, प्रतिभा चयन प्रक्रिया को और बेहतर बनाने, खेल संस्थानों में खेल विज्ञान की सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा खिलाड़ियों के लिए बेहतर और सकारात्मक वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। मेरा मानना है कि यह कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़ के खेल विकास की दिशा में एक अच्छी शुरुआत है। यहां हुए विचार-विमर्श और विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो आने वाले वर्षों में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे और छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे।
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प्रश्न: भारत को विश्व की अग्रणी खेल शक्तियों में शामिल करने के लिए साई की भविष्य की प्राथमिकताएं क्या हैं?

उत्तर: देखिए, भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2036 तक भारत विश्व के शीर्ष 10 खेल देशों में शामिल हो और वर्ष 2047 तक विश्व के शीर्ष पांच खेल देशों में अपनी जगह बनाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए हमारा मुख्य फोकस खेलो इंडिया योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, खिलाड़ियों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, आधुनिक खेल बुनियादी ढांचा तैयार करने और राज्यों के साथ मिलकर काम करने पर रहेगा। हमारा प्रयास यह भी रहेगा कि खेल सुविधाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और छोटे शहरों तक भी पहुंचें। जमीनी स्तर पर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा। राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत व्यवस्था विकसित की जाएगी। हमारा उद्देश्य ऐसी खेल प्रणाली तैयार करना है, जिसके माध्यम से भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करें और वर्ष 2036 तथा 2047 के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में देश का योगदान बढ़े।
प्रश्न: पुलिस सेवा और खेल प्रशासन के अनुभव में क्या समानता देखते हैं?
उत्तर: समानता जैसा नहीं है, देखिए दोनों क्षेत्रों में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चाहे पुलिस सेवा हो या खेल प्रशासन, उद्देश्य संस्थान के लक्ष्य को पूरा करना और योजनाओं को जमीन तक पहुंचाना होता है। पुलिस सेवा में अपराध नियंत्रण, जांच और नवाचार पर काम किया जाता है। वहीं खेल प्रशासन में खिलाड़ियों को अवसर देना, सुविधाएं उपलब्ध कराना और बेहतर व्यवस्था तैयार करना प्रमुख जिम्मेदारी है। उदाहरण के तौर पर आप देखेंगें कि छत्तीसगढ़ पुलिस कम बल क्षमता के बगैर भी बेहतर जिम्मेदारी निभा रही है। नक्सलमुक्त बनाने जैसे अपराध पर काबू पाना एक अहम कार्य है। हां अपने रूची के कार्य से जुड़े है तो उसे और बेहतर किया जा सकता है। कहने का मतलब कि सरकार के विजन को पूरा करने की अहम जिम्मेदारी है।
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प्रश्न: प्रयागराज से आपकी शुरुआत, इंजीनियरिंग, ntpc और फिर आईपीएस तक का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है। इसके बारे में बताना चाहेंगे?

उत्तर: मैं मूल रूप से प्रयागराज का हूं। मेरी शुरुआती शिक्षा सामान्य सरकारी स्कूलों में हुई। इसके बाद मैंने इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग के बाद जीवन में संघर्ष का दौर आया। परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए पहले आर्थिक स्थिरता जरूरी थी, इसलिए नौकरी किया।
नौकरी के साथ सिविल सेवा की तैयारी करना आसान नहीं था। संघ लोक सेवा आयोग का पाठ्यक्रम बहुत विस्तृत होता है और समय निकालना चुनौतीपूर्ण होता है। छह घंटे सोना भी मुश्किल था, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, सही रणनीति और अनुशासन के साथ मैंने तैयारी जारी रखी। सीमित समय का बेहतर उपयोग किया और मेहनत के परिणामस्वरूप सफलता मिली।
संयोग से चयन के समय मेरी पोस्टिंग ntpc कोरबा में थी और मुझे छत्तीसगढ़ कैडर मिला। बाद में मुझे कोरबा sp की जिम्मेदारी भी मिली।
प्रश्न: एक खिलाड़ी के जीवन में अनुशासन और निरंतर अभ्यास का कितना महत्व है?
उत्तर: खेल केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह एक विज्ञान है। एक पेशेवर खिलाड़ी की पूरी दिनचर्या योजना के अनुसार चलती है। अभ्यास, खान-पान, फिटनेस, रिकवरी और मानसिक तैयारी सभी महत्वपूर्ण हैं।

सफल खिलाड़ी बनने के लिए अनुशासन सबसे जरूरी है। जो खिलाड़ी उत्कृष्टता हासिल करना चाहता है और देश के लिए खेलना चाहता है, उसके लिए मेहनत और समर्पण अनिवार्य है। अपने मन के हिसाब से मिठाई भी नहीं खा सकता है। कहने का तात्पर्य यही है कि खेल के प्रति लगाव के साथ खिलाड़ी को हर परिस्थति में तैयार और संयम रखना होता है।
प्रश्न: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। राज्य को आगे बढ़ाने के लिए क्या जरूरी है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। आवश्यकता है उन्हें सही प्रशिक्षण, बेहतर सुविधाएं और अवसर देने की। हमें अपनी मजबूत खेल विधाओं को पहचानकर रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। अगर योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं तो छत्तीसगढ़ खेलों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
प्रश्न: छत्तीसगढ़ के विकास को आप किस नजरिए से देखते हैं?

उत्तर: छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां खनिज संपदा, उद्योग और विकास की अपार संभावनाएं हैं। कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और चूना पत्थर जैसे संसाधनों का बेहतर उपयोग राज्य को तेजी से आगे ले जा सकता है। एनएमडीसी जैसे कई औद्योगिक प्लांट स्थापित हो रहे है, इससे प्रदेश में विकास लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में और भी संभावनाएं हैं।
प्रश्न: युवाओं के लिए आपका संदेश?
उत्तर: युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्हें अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगानी चाहिए। खेल, शिक्षा और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से युवा देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण सफलता की कुंजी है।
प्रश्न: जेन-जी जैसे युवाओं को क्या सही दिशा देने की जरूरत है या जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को कितना सही मानते जा सकते हैं?
उत्तर: देखिए, मैं अभी खेल क्षेत्र से जुड़ा हुआ हूं और मुझे पता है कि एक युवा के लिए खेल से ज्यादा रोमांचक शायद ही कुछ हो सकता है। आज के युवा खेलों में बहुत रुचि ले रहे हैं और उस रोमांच को महसूस कर रहे हैं।

हमने देखा कि फीफा वर्ल्ड कप में 48 देश हिस्सा लेते हैं, लेकिन भारत अभी तक उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। मैं इस चुनौती को स्वीकार करने की भावना रखता हूँ कि भारत को आने वाले समय में फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंचों पर पहुँचना चाहिए। इसके लिए हमें खेलों को अपनाना होगा, खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना होगा और निरंतर प्रगति की दिशा में काम करना होगा।
मेरा मानना है कि युवाओं और खेलों का संबंध बहुत गहरा है। युवा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। हमारा प्रयास यही होना चाहिए कि अधिक से अधिक लोग खेलों की ओर आएं, खेलों से जुड़ें और उस रोमांच एवं ऊर्जा का अनुभव करें।
जहां तक आपने सरकारी कर्मचारी के रूप में मेरी भूमिका के बारे में पूछा है, उस विषय पर मेरा कुछ कहना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना अवश्य कहूंगा कि युवाओं को खेलों से जोड़ना और खेल संस्कृति को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है।









