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कबीरनगर ने खोया अपना अभिभावक: बहुत ही सरल-सहज थे रूपनारायण सिन्हा भाईसाहब

अपने अभिभावक, मार्गदर्शक और आत्मीय साथी को खोने का दर्द महसूस कर रहे

रायपुर। छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता रूपनारायण सिन्हा के आकस्मिक निधन से रायपुर सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। बिलासपुर में हार्ट अटैक से उनके निधन की खबर जैसे ही लोगों तक पहुँची, कबीरनगर क्षेत्र में हर आंख नम हो गई। लोग सिर्फ एक नेता के जाने का दुख नहीं मना रहे, बल्कि अपने अभिभावक, मार्गदर्शक और आत्मीय साथी को खोने का दर्द महसूस कर रहे हैं।

लोग उन्हें “भाईसाहब” कहकर याद कर रहे हैंकबीरनगर की गलियों में आज भी लोग उन्हें “भाईसाहब” कहकर याद कर रहे हैं। वर्षों से क्षेत्र में रहने वाले रूपनारायण सिन्हा अपने सरल, सहज और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण हर वर्ग के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। राजनीतिक पहचान होने के बावजूद उन्होंने कभी लोगों को यह महसूस नहीं होने दिया कि वे किसी दल विशेष से जुड़े हैं। जरूरत पड़ने पर वे हर व्यक्ति के लिए एक परिवारजन की तरह खड़े दिखाई देते थे।

लोगों के जीवन को जोड़ने का काम कियास्थानीय रहवासी प्रमोद पंडित भावुक होकर कहते हैं कि “भाईसाहब ने सिर्फ राजनीति नहीं की, बल्कि लोगों के जीवन को जोड़ने का काम किया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा लगाने से लेकर समाज में अच्छे व्यवहार और संस्कारों की सीख देने तक, उन्होंने हमेशा लोगों को प्रेरित किया। वे कहा करते थे कि सिर्फ संघ से जुड़ना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका प्रभाव हमारे व्यवहार में दिखना चाहिए।”

कभी किसी को अकेला महसूस नहीं होने दियापं. पीके तिवारी भी उन्हें याद करते हुए कहते हैं, “उन्होंने कभी किसी को अकेला महसूस नहीं होने दिया। चाहे किसी के घर सुख हो या दुख, भाईसाहब सबसे पहले पहुंचने वालों में रहते थे। उनकी कमी कोई पूरा नहीं कर पाएगा।”

केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं थारूपनारायण सिन्हा का जीवन केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था। सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भूमिका हमेशा दिखाई देती थी। उनके नेतृत्व में ही कबीरनगर में दशहरा उत्सव की परंपरा शुरू हुई, जो आज पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। गौरक्षा, धर्मांतरण के विरुद्ध जनजागरण और हिंदुत्व से जुड़े विषयों पर वे सदैव मुखर और सक्रिय रहे।

वे अक्सर कहा करते थे—
“आपका व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि दूर से ही लोगों को लगे कि आप संघ से जुड़े हैं।”उनके शब्द केवल भाषण नहीं, बल्कि उनके जीवन का प्रतिबिंब थे। सहज मुस्कान, आत्मीय व्यवहार और सभी को साथ लेकर चलने की उनकी शैली ने उन्हें हर दिल के करीब बना दिया था।

आज कबीरनगर की फिजाओं में एक अजीब सी खामोशी है। लोग मानो अपने परिवार के किसी बड़े सदस्य को विदा कर रहे हों। राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर हर दल और हर वर्ग के लोगों से उनके आत्मीय संबंध थे। यही कारण है कि उनके निधन को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है। रूपनारायण सिन्हा अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सीख, उनके संस्कार और समाज के प्रति उनका समर्पण हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

भाईसाहब से जुड़ी पुरानी यादें आज भी मन को भावुक कर देती हैंपत्रकार पंकज दुबे कहते हैं कि रूपनारायण सिन्हा भाईसाहब केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक ऐसी आत्मीय शक्ति थे, जिनकी उपस्थिति हर व्यक्ति को अपनापन महसूस कराती थी। उन्होंने कहा कि भाईसाहब से जुड़ी पुरानी यादें आज भी मन को भावुक कर देती हैं। उनका सरल स्वभाव, सहज मुस्कान और हर छोटे-बड़े व्यक्ति के प्रति सम्मान का भाव उन्हें सबसे अलग बनाता था।

Vyavasay Khabar की पूरी टीम की ओर से श्रद्धेय रूपनारायण सिन्हा जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
उनका सरल व्यक्तित्व, आत्मीय व्यवहार और समाज के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने जीवन से सेवा, संस्कार और सामाजिक एकता का जो संदेश दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार और उनके चाहने वालों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति।

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